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सेवाश्रम में पहुंचने पर बचपन की यादें हुई ताजा

  • गांव मक्कासर में संचालित एकलव्य सेवाश्रम में पहुंचे पूर्व छात्र का किया स्वागत
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    गांव मक्कासर में संचालित एकलव्य सेवाश्रम का एक पूर्व छात्र गुरुवार को सेवाश्रम पहुंचा तो उसकी बचपन की यादें ताजा हो गर्इं। करीब चार साल की उम्र से एकलव्य सेवाश्रम में रहा यह छात्र शिक्षा के साथ खेल के क्षेत्र में परचम लहरा रहा है। मां-बाप से बिछड़ने के बाद से यह छात्र अपनी दो बहनों के साथ पांच साल तक सेवाश्रम में रहा। अब वह जिला मुख्यालय पर रह रहा है। अब तक वह कई प्रतियोगिताओें में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर चुका है। गुरुवार को एकलव्य सेवाश्रम पहुंचने पर इस छात्र का सेवाश्रम संचालकों की ओर से माला पहनाकर स्वागत किया गया। सेवाश्रम के सुखराम मेहरड़ा ने बताया कि मनोज भारती 8 दिसम्बर 2008 से एकलव्य सेवाश्रम में रह रहा था। मनोज भारती अपने दो भाई-बहनों के साथ रेलवे स्टेशन पर मिला था। दस साल बाद मनोज भारती एकलव्य सेवाश्रम में आया। इस दौरान मनोज भारती ने बड़ी उपलब्धि हासिल की जो सबके लिए बड़े गर्व की बात है। इससे एकलव्य सेवाश्रम का पूरा परिवार खुश है कि मनोज भारती आज भी सेवाश्रम की चिन्ता करता है। एकलव्य सेवाश्रम सदैव मनोज भारती की मदद के लिए तैयार रहेगा। यही कामना है कि मनोज भारती बड़ा होकर काबिल आॅफिसर बने। उन्होंने कहा कि एकलव्य सेवाश्रम का संचालन अनाथ, लावारिस, बेसहारा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने और उन्हें संस्कारित करने के लिए किया जा रहा है। इसका संचालन 1994 से किया जा रहा है। एकलव्य सेवाश्रम के संस्थापक रामसिंह अतुल हैं। वर्तमान में कौशल्या देवी की ओर से एकलव्य सेवाश्रम का संचालन किया जा रहा है। वहीं छात्र मनोज भारती ने बताया कि उसने हाल ही में 11वीं कक्षा पास की है। जब वह चार साल का था तब उसके माता-पिता बिछड़ गए थे। इसके बाद वह एकलव्य आश्रम में पला-बढ़ा। 2013 में उसे एकलव्य सेवाश्रम से हनुमानगढ़ भेज दिया गया। हनुमानगढ़ में वह संस्था में पढ़ा। स्पोर्ट्स में रूचि भी थी। इसके चलते उसे जिला स्तर की जूडो कराटे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला। प्रतियोगिता में उसने गोल्ड मैडल और सिल्वर मैडल जीता। इसके अलावा वह बैडमिंटन, खो-खो, कबड्डी, ड्राइंग, पेंटिंग, डांस प्रतियोगिता में हिस्सा लेता रहता है। वर्तमान में वह आर्मी में भर्ती की तैयारी कर रहा है। बच्चों को योगाभ्यास भी करवाया जा रहा है। छुट्टियां होने के कारण वह एकलव्य सेवाश्रम में अपना बचपन देखने पहुंचा है। एकलव्य सेवाश्रम में पहुंचकर उसे अपना बचपन याद आ गया। मनोज भारती ने बताया कि उसके परिवार में उसकी दो बहनें हैं। दोनों बालिका गृह में रहती हैं। जब वह यहां रहता था तो कभी यह अहसास नहीं हुआ कि उसके मां-बाप नहीं हैं।