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हरी सब्जियों को खाने से पहले ध्यान दें:ऐसे चेक करें सब्जियों में मिलावट, FSSAI ने बताया आसान तरीका

मुंबई

आप यह कैसे पता लगाएंगे कि जो हरी पत्तेदार सब्जियां आपने बाजार से ताजा खरीदी हैं, वे मिलावटी हैं या नहीं? चूंकि हरी पत्तेदार सब्जियां कई तरह का फायदा देती हैं। इसलिए आपको चाहिए कि सब्जियों में मिलावट को चेक करें।

FSSAI ने वीडियो जारी कर बताया तरीका

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस संबंध में एक वीडियो जारी किया है। इसमें उसने कुछ ऐसे घरेलू आसान उपाय बताए हैं, जिससे आप सब्जियों में मिलावट का पता कर सकते हैं। हरी सब्जियां आपके शरीर को कई जानलेवा बीमारियों से बचाती हैं। साथ ही आपकी हड्डियों और आंत को भी स्वस्थ रखती हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप मिलावटी सब्जियों का सेवन तो नहीं कर रहे हैं, जिससे आगे चलकर आपको स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

हरी सब्जियों में होती है मिलावट

ऐसे कई तरीके हैं जिसके जरिए हरी पत्तेदार सब्जियों में मिलावट की जाती है। कुछ व्यापारी सब्जियों को जल्दी पकने के लिए कीटनाशकों का इंजेक्शन लगाते हैं। कुछ सिंथेटिक रंग या मैलाकाइट का हरा और मोम का लेप मिलाते हैं। इससे सब्जियां अधिक चमकदार और हरी हो जाती हैं। इसके अलावा भी सब्जियों में मिलावट करने के कई और तरीके भी हो सकते हैं।

आपकी सब्जियां मिलावटी हैं या नहीं, यह पता लगाने का एक आसान तरीका है। FSSAI ने इसके चार तरीके बताए हैं। इन चार तरीकों के जरिए इस तरह से आप सब्जी में मिलावट चेक कर सकते हैं।

ये हैं सब्जियों को चेक करने के चार तरीके
1- लिक्विड पैराफिन में डूबा हुआ एक रूई का बॉल लें
2- इस बॉल से हरी सब्जी की बाहरी हरी सतह पर मलें
3- रूई का रंग नहीं बदला तो समझो सब्जी में मिलावट नहीं है
4- और अगर रुई हरी हुई तो सब्जी मिलावटी है

मैलाकाइट ग्रीन क्या है?
यह आपकी सब्जियों को हरा रंग देने के लिए सबसे आम मिलावटों में से एक है। इसके उपयोग से मनुष्यों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, मैलाकाइट ग्रीन का मछली पालन उद्योग में ऐंटिफंगल एजेंट के रूप में ज्यादा उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग कपड़ा उद्योगों में नायलॉन, ऊन, रेशम, चमड़ा और कपास की रंगाई के लिए भी किया जाता है।

मैलाकाइट हरा कार्सिनोजेनेसिस, म्यूटेनेसिस, क्रोमोसोमल फ्रैक्चर, टेराटोजेनिकिटी और श्वास संबंधी रोग का कारण बन सकता है।

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