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हॉलमार्किंग की अनिवार्यता के साथ बढ़ी स्वर्ण कारोबारियों की चिंता

बीकानेर.
स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य रूप से हॉलमार्किंग करवाए जाने के नियम जारी होने के साथ ही जिले के स्वर्ण आभूषण व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

असल में वे हॉलमार्किंग नियम से चिंतित नहीं है, बल्कि उनकी चिंता जोखिम से जुड़ी है। व्यापारियों का तर्क है कि बीकनेर शहर में अधिकृत हॉलमार्किंग सेंटर की संख्या महज दो है। ऐसे में अब हॉलमार्किंग के लिए स्वर्ण आभूषण कारोबारियों को अपने आभूषण बीकानेर लाने होंगे।

ऐसा करना ना केवल उनके लिए जोखिमभरा होगा, बल्कि इसमें उनका समय भी जाया होगा। बीकानेर सर्राफा समिति सहित अन्य स्वर्ण आभूषणों के बड़े विक्रेताओं ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए इससे जुड़ी सुविधाओं में विस्तार करने की आवाज उठाई है। स्वर्ण कारोबारी शिव कुमार सोनी ने बताया कि हॉलमार्किंग से स्वर्ण आभूषण की विश्वसनीयता बढ़ेगी। लेकिन जोखिम भी कम नहीं है।

मोबाइल सर्विस होनी चाहिए
स्वर्ण कारोबारी शिव कुमार सोनी ने बताया कि देश के २५६ जिलों में १६ जून से स्वर्ण आभूषणों पर हॉलमार्किंग की अनिवार्यता लागू हो चुकी है। इसमें बीकानेर जिला भी शामिल है। अब यहां के स्वर्ण आभूषण विक्रेताओं को अपने उत्पाद पर हॉलमार्किंग अनिवार्य रूप से करवानी होगी। हालांकि इस अनिवार्यता में फिलहाल कुंदन और मीना कारोबार को छूट दी गई है। साथ ही जिन कारोबारियों का सालाना कारोबार ४० लाख से कम होगा, फिलहाल उन्हें भी १६ सितम्बर तक अपने पुराने ज्वेलरी आभूषण को बेचने की अनुमति दी जा चुकी है। सोनी ने बताया कि ४० लाख से अधिक सालाना कारोबार करने वाले व्यापारी को अनिवार्य रूप से अपने आभूषण पर न केवल हॉलमार्किंग करवानी होगी, बल्कि ग्राहक को पक्का बिल भी देना होगा। वर्तमान में आभूषण की गुणवत्ता और बिल को लेकर ग्राहकों में संशय बना रहता है। हॉलमार्किंग व्यवस्था के बाद ग्राहक की धारणा में बदलाव होगा और उन्हें शुद्ध सोने के आभूषण मिल सकेंगे।

नहीं कटेगा काटा
स्वर्ण आभूषण विक्रेताओं की मानें तो जिन आभूषणों पर हॉलमार्किंग होगी उन्हें ग्राहक की ओर से विक्रय करने पर कोई काटा (रुपए की कटौती) नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि सर्टिफाइड ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टैंडर्ड की ओर से दिए जाने वाले हॉलमार्क सर्टिफिकेट से पूर्व स्वर्ण आभूषणों को पुन: बेचने पर ग्राहक को नुकसान का सामना करना पड़ता था।

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