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24 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ने खिंसर दिवस मनाया

सीमा सन्देश न्यूज
श्रीगंगानगर।
24 मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री (20 राजपूत) को भारतीय सेना की सबसे पुरानी बटालियन होने का गौरव प्राप्त है। बटालियन ने 5 दिसंबर को 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान प्राप्त हुए गौरव युद्ध सम्मान ‘खिंसर’ और थिएटर सम्मान ‘सिंध’ की स्वर्ण जयंती मनाई। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए लालगढ़ जाटान सैन्य छावनी परिसर में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इसमें युद्ध के दिग्गजों व वीर नारियों को सम्मानित किया गया। उन बहादुर वीर शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने भारतीय सेना की समृद्ध परंपराओं को बनाए रखते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 (आॅपरेशन कैक्टस लिली) के दौरान 24 मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री पूर्व में 20 राजपूत थार रेगिस्तान के बाड़मेर सेक्टर में वीरतापूर्वक बहादुरी से लड़ी। बटालियन को खिंसर पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था, जो एक महत्वपूर्ण संचार केन्द्र था, जिसमें एक एडवांस लैंडिंग ग्राउंड था, जो पाकिस्तान के क्षेत्र में लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित था। कड़ाके की ठंड के बावजूद 24 मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री बटालियन के वीर सैनिकों ने दुश्मन की चौकियों पर एक साहसी हमला किया और 5 दिसंबर 1971 की आखिरी रौशनी में खिंसर पर कब्जा करने में सक्षम थे। आॅपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सेना के कई सैनिक मारे गये और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया गया। बटालियन को भारत पाकिस्तान युद्ध 1971 के दौरान अपनी वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए युद्ध सम्मान ‘खिंसर’ और थिएटर सम्मान ‘सिंध’ से सम्मानित किया गया था। इस आॅपरेशन के लिए बटालियन के सैनिकों को तीन सेना मैडल और तीन मेंशन-इन-डिस्पैच से सम्मानित किया गया। लालगढ़ जाटान छावनी में आयोजित कार्यक्रम में बलिदानी सैनिकों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। सैनिक सम्मेलन आयोजित किया गया और इस मौके पर 1971 की विजय से संबंधित विशेष कवर व सूचना पत्र जारी किया गया।

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