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शिक्षक को अपना होना साबित करना होगा : सुंदरम

सीमा सन्देश न्यूज
श्रीगंगानगर।
सृजन सेवा संस्थान की ओर से रविवार को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को समर्पित एक अनूठा कार्यक्रम हुआ। जवाहरनगर स्थित महाराजा अग्रसेन विद्या मंदिर में आयोजित सृजन के मासिक कार्यक्रम लेखक से मिलिए के साथ सृजन शिक्षक सम्मान समारोह के प्रारंभ से लेकर समापन तक सम्पूर्ण संचालन शिक्षकों ने ही किया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य द्वारकाप्रसाद नागपाल, हिंदी व्याख्याता सुरेंद्र सुंदरम एवं महाराजा अग्रसेन विद्या मंदिर स्कूल की प्रधानाध्यापिका अनामिका दाधीच को सृजन शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें शिक्षाविद् सुमन झा तथा समाजसेवी विजयकुमार गोयल व विनोद गुप्ता ने शॉल ओढ़ाकर, सम्मान प्रतीक एवं पुस्तक भेंट करके सम्मानित किया।
कार्यक्रम में कवि सुरेंद्र सुंदरम ने अपनी कविताओं से समां बांधा। उन्होंने प्रेम कविताओं से शुरूआत की और सामाजिक विसंगतियों तथा राजनीतिक विद्रूताओं पर कटाक्ष करती कविताओं तक पहुंचे। सुंदरम ने ग्रामीण परिवेश की कड़वी सच्चाइयों से रूबरू करवाती कुछ लघुकथाएं भी सुनाई। उनकी कविताओं एवं लघुकथाओं को सुनकर श्रोता देर तक भाव-विभोर होते रहे। महाराजा अग्रसेन विद्या मंदिर की ओर से भी कवि सुंदरम का सम्मान किया गया।
इस मौके पर सुंदरम ने मौजूदा समय को शिक्षकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि हमें इस समय में भी अपना होना साबित करते रहना है। अनामिका दाधीच ने माना कि जिन लोगों ने गांव नहीं देखा, उन्हें सुंदरम की कविताओं के शब्द चित्र गांवों के दर्शन करवाते हैं। द्वारकाप्रसाद नागपाल ने कहा कि उनकी पूरी नौकरी ग्रामीण क्षेत्र में गुजरी है। इसलिए वे जानते हैं कि गांवों में शिक्षा, शिक्षक, स्कूल और विद्यार्थी की क्या हालत हैं।
कार्यक्रम में दर्शनशास्त्र के व्याख्याता डॉ. संदेश त्यागी ने स्वागत किया। आभार वरिष्ठ अध्यापिका सुषमा गुप्ता ने व्यक्त किया। संचालन वरिष्ठ अध्यापिका मीनाक्षी आहुजा ने किया। कार्यक्रम में शिक्षक, साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

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