जयपुर
राजस्थान में छह जिलों में हुए पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव में जयपुर जिला परिषद में कांग्रेस ने बहुमत के बावजूद जिला प्रमुख का पद गंवा दिया था। इसका मूल कारण था कांग्रेस के सिंबल से जीती हुई प्रत्याशी रमा देवी को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाकर जीता था। इस उलटफेर ने सबको चौंका दिया था। हालांकि उप जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा को कांग्रेस ने शिकस्त दी। जिला प्रमुख बनने के बाद दैनिक भास्कर टीम ने रमा देवी से खास बातचीत की और जाना आखिर उन्होंने किस तरह से जिला प्रमुख की सीट मिली। साथ ही उनके कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के पीछे की कहानी क्या है? इस पर उन्होंने बताया कि कांग्रेस में सिर्फ वो कार्यकर्ता ही बनकर रहती। भाजपा में आते ही जिला प्रमुख बन गई। इतना बड़ा फर्क है दोनों पार्टियों में। यहां रंक को राजा और राजा को रंक बना दिया जाता है।

जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के दौरान विधायक बाबूलाल नागर संग प्रचार-प्रसार करती रमा देवी।
चुनाव कांग्रेस के सिंबल पर और जिला प्रमुख के लिए भाजपा, ये सब कैसे हुआ?
रमा देवी : चुनाव जीतकर आए सदस्यों की कांग्रेस ने कोई मीटिंग ही नहीं करवाई। लोकतंत्र में ऐसा होता है क्या? ऊपर से फरमान आ गया कि शर्मा जी ही जिला प्रमुख बनेंगी। हर बात में हाईकमान-हाईकमान की रट लगाकर कार्यकर्ता को चुप कर देते हैं। भाजपा ने योग्यता देख सीधे जिला प्रमुख बना दिया।
कांग्रेस के सिंबल से चुनाव लड़कर आपने कांग्रेस को ही हरा दिया?
रमा देवी : मैं कौन होती हूं हराने वाली। ये तो अपने कर्मों से हारे। कद्र कहां करते हैं किसी की।

जिला प्रमुख का चुनाव लड़ने से पहले भाजपा की सदस्य ग्रहण करते हुए रमा देवी।
क्या आपने जिला प्रमुख बनने के लिए पार्टी बदल दी? अब जनता और आपके कार्यकर्ताओं को क्या जवाब देंगी?
रमा देवी : मैंने कार्यकर्ताओं और अपने इलाके के हित में पार्टी बदली। जिला परिषद सदस्य रहकर मैं कितना विकास करवा पाती, अब जिला प्रमुख के रूप में इलाके में विकास की गंगा बहा दूंगी।
भाजपा में आपकी किस स्तर पर बात हुई और क्या वहां से आपको किसी तरह का ऑफर आया था?
रमा देवी : भाजपा में सीधे प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया से बात हुई, जहां हमने उनके सामने जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के विकास का एजेंडा रखा और पार्टी में मान-सम्मान दिलाने की मांग रखी। पूनिया ने हमारी बात सुनी और आश्वासन दिया कि अगर आपने जयपुर के लिए कुछ सोच रखा है तो हम आपका सहयोग जरूर करेंगे। भाजपा की तरफ से हमारे पास कोई ऑफर नहीं आया, हम खुद वहां गए।

जिला प्रमुख का चुनाव जीतने के बाद जिला परिषद कार्यालय से जातीं रमा देवी।
कांग्रेस ने 6 साल के लिए निष्कासित किया है आपको, क्या कहना है ?
रमा देवी: कांग्रेस में मतभेद बहुत ज्यादा है, जिस पार्टी में कार्यकर्ता 25-30 साल से जी-जान जुटाकर लगे हैं, उन्हें पार्टी में ऊपर बैठे लोग कार्यकर्ता से ज्यादा और कुछ नहीं बनने देते। वहां कार्यकर्ता को केवल कार्यकर्ता ही बनाए रखना चाहते है। 25 साल पार्टी को देने वालों को एक पार्षद का टिकट लेने में खूब संघर्ष करना पड़ा। पार्टी में भी हमें न कोई मान-सम्मान मिला और न ही पद, ऐसे में हमारे कार्यकर्ताओं की भी हमसे आशा रहती है कि उनका कोई काम हो।

जिला प्रमुख का चुनाव जीतने के बाद अपने घर अपनी दादी सास से आशीर्वाद लेतीं रमा देवी।
क्या आपने कांग्रेस में जिला प्रमुख के लिए दावेदारी की थी?
रमा देवी : पार्षद के चुनाव जीतने के बाद हमने हर स्तर पर अपना बायोडाटा भेजा था, लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते थे कि हम जिला प्रमुख बने। नगर निगम जयपुर के चुनाव में भी उन्होंने हमें टिकट नहीं लेने दिया। इसलिए कार्यकर्ताओं की भावनाओं को देखते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा।
उप जिला प्रमुख हार गए, क्या कारण मानते हो?
रमा देवी : उप जिला प्रमुख के चुनाव में कुछ तो गड़बड़ हुई है, लेकिन कहां और किस स्तर पर हुई कुछ कह नहीं सकते।