बीकानेर. नगर निगम क्षेत्र में सडक़ों पर घूम रहे बेसहारा गौवंश को कोई ठौर नहीं मिल रही है। नगर निगम ना अपनी गौशाला में इनको ले रहा है और ना ही शहरी क्षेत्र में संचालित हो रही निजी गौशालाएं बेसहारा पशुओं को लेने में रूचि दिखा रही हैं। सडक़ों पर बेसहारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। आए दिन पशुओं की चपेट में आने से लोग घायल हो रहे हैं। हालात यह है कि शहर के मुख्य बाजारों, मुख्य मार्गों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक बेसहारा पशुओं के झुण्ड नजर आ रहे हैं। इनके चारा, घास की उचित व्यवस्था नहीं होने से शहर में जगह-जगह बनी कचरे की ढेरियों के आस-पास ये मंडराते रहते हैं। खाने की वस्तुओं के साथ पॉलीथिन की थैलियां इनके पेट में जाने से इनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रही है।
हजारों पशु, रखने की योजना नहीं
शहर की सडक़ों पर हजारों गाय और गोधे घूम रहे हैं। इन बेसहारा पशुओं को रखने और इनका पेट भरवाने के लिए नगर निगम के पास योजना ही नहीं है। निगम ने सरेह नथानिया स्थित अपनी गौशाला में भी पिछले कई महीनों से बेसहारा पशुओं को रखने पर रोक लगा रखी है। शहर में छह छोटी-बड़ी और निजी गौशालाएं है, लेकिन ये गौशालाएं गोधे रखने को तैयार नहीं हो रही हैं। हालांकि एक बार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रही गौशालाओं में उनकी क्षमता अनुसार गोधे भेजने पर चर्चा हुई, लेकिन यह योजना अब तक पूर्ण रूप से सिरे नहीं चढ़ पाई है।
यातायात में बाधक, कई लोगों की जा चुकी जान
बेसहारा पशु शहर में यातायात में बाधक भी बन रहे है। आवासीय क्षेत्रों के साथ कोटगेट, फड़बाजार, केईएम रोड, स्टेशन रोड, सार्दुल सिंह सर्कल, पुराना बस स्टैण्ड, जस्सूसर गेट, जैसलमेर हाइवे, श्रीगंगानगर हाइवे, जयपुर हाइवे, जोधपुर हाइवे सहित पुराने शहर की गली, मोहल्ले और चौक-चौराहों व बाजारों में जगह-जगह बेसहारा पशु झुण्ड के रूप में खड़े रहते है। आए दिन लोग इनकी चपेट में आ रहे है। कई लोगों की जान बेसहारा पशुओं की चपेट में आने से जा चुकी है।