बीकानेर. श्रीडूंगरगढ़. अगर आप अपने निजी वाहन या बस से नेशनल हाइवे-11 पर सफ र करते हुए श्रीडूंगरगढ़ के अंदर से गुजर रहे हो और आपने यहां के केसर पेड़ों का स्वाद नही चखा तो निश्चित आपके सफ र का आनन्द अधूरा रहेगा। श्रीडूंगरगढ़ में नेशनल हाईवे पर स्थित दुकान में मिलने वाले केशर पेड़ों की खरीद न सिर्फ शहरी व ग्रामीण लोग करते हैं। बल्कि इस हाईवे से गुजरने वाले लोग भी बड़े चाव से इन पेड़ों को खरीदते है। यहां पर बनने वाले कम चीनी के स्पेशल पेड़े ओर भुजिया भी काफ ी मशहूर है। यहां स्थित दुकानों में मिलने वाले केशर पेड़ों की मांग काफ ी रहती है।
कम चीनी के पेड़ों की भी मांग
दुकानदार चिमनलाल व मनोज कुमार मोरवानी ने बताया दुकान में कई तरह के पेड़े बनाए जाते हैं। पिछले 50 साल से भी अधिक समय से यह काम कर रहे हैं। इनमे केसर पेड़ों के साथ-साथ कम चीनी से बने स्पेशल पेड़ों की भी काफ ी मांग है। आसपास के क्षेत्र के लोग भी इन पेड़ों की काफ ी मांग करते है। पेड़े बनाने के लिए एक किलो मावे में 200 ग्राम चीनी व केशर का प्रयोग किया जाता है।
प्रतिदिन करीब 50 किलो की खपत
दुकानदार के अनुसार प्रतिदिन 50 से 55 किलो पेड़ों की बिक्री की जाती है। इस दुकान में केसर पेड़ा स्पेशल पेड़े, भुजिया विक्रय किए जाते है।
हाईवे से गुजरने वाले लोग केसर पेड़ों को खरीदते हैं। श्रीडूंगरगढ़, जयपुर, दिल्ली, जोधपुर, गुजरात जाने वाले लोग बड़े चाव से केशर पेड़ों व चीनी कम स्पेशल पेड़ों को पसंद करते हैं। शुद्धता में समझौता नहीं करने के कारण ही केशर पेड़ों की पहचान बनी है। गत 53 सालों से हाईवे पर स्थित इस दुकान में मिठाई का कारोबार कर रहे हैं।
मनीष मोरवानी, दुकानदार