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अभी भी निवेश का मौका:इस साल 70000 तक जा सकता है सेंसेक्स; एक्सपर्ट्स से जानिए अब कैसे और कहां बनेगा पैसा

मुंबई

भारतीय शेयर बाजार ने वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी तिमाही यानी सितंबर खत्म होने से पहले ही नया इतिहास रच दिया है। सेंसेक्स ने ये अकेला रिकॉर्ड नहीं बनाया है। कई और भी रिकॉर्ड हैं जो इसके साथ जुड़ गए हैं। सेंसेक्स ने 10,000 पाइंट्स यानी 50,000 से 60,000 तक का सफर सिर्फ 161 दिनों में पूरा किया। जबकि 40,000 से 50,000 तक जाने में इसने 415 दिन लगाए थे।

जानकारों की मानें तो बाजार में तेजी मार्च तक जारी रहेगी। वहीं, दिसंबर तक सेंसेक्स 70,000 के आंकड़े को पार कर सकता है।

छोटी अवधि में थोड़ी गिरावट, लंबी अवधि में जोरदार फायदा
जानकार मान रहे हैं कि छोटी अवधि में कुछ गिरावट आ सकती है, लेकिन लंबी अवधि में तेजी जारी रहेगी। बाजार के लिए जो भी निगेटिव माहौल थे, उनसे वो बाहर आ चुका है।

रियल एस्टेट, कैपिटल गुड्स और इंफ्रा सेक्टर में निवेश करें
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा कहते हैं कि निफ्टी और सेंसेक्स ने कोरोना के समय निचले स्तर से 140% की ग्रोथ की है। कोरोना की दूसरी लहर में IT सेक्टर ने तेजी दिखाई है। यहां से कोई गिरावट बाजार में आती है तो निवेशकों को रियल एस्टेट, कैपिटल गुड्स और इंफ्रा सेक्टर में निवेश करना चाहिए। साथ ही म्यूचुअल फंड के SIP में भी निवेशक पैसे लगा सकते हैं। हो सकता है कि अक्टूबर में थोड़ी गिरावट बाजार में आ जाए, पर बाजार अगले 2-3 सालों तक तेजी में रह सकता है।

खरीदारी करें, लेकिन एक बार मे पूरे पैसे न लगाएं
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान कहते हैं कि भारत के लिए सेंसेक्स का 60,000 बड़ा अचीवमेंट है। खासकर तब, जब पूरी दुनिया के बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। इस साल में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अच्छी खरीदारी बाजार में की है। आने वाले महीने में कॉर्पोरेट की अर्निंग मजबूत रहेगी। जिससे बाजार की तेजी में मदद मिलेगी। निवेशकों को चाहिए कि वे जिन शेयर्स में फायदा कमाए हैं, उसमें मुनाफा वसूली करें। उन्होंने कहा कि निवेशक चुनिंदा शेयर्स में खरीदारी करते रहें। खासकर मजबूत कंपनियों में मध्यम से लंबी अवधि के नजरिए से। यह खरीदारी चरणबद्ध तरीके से करनी चाहिए। यानी एक ही बार मे पूरे पैसे न लगाएं।

निवेशक असेट अलोकेशन का रास्ता अपनाएं
महिंद्रा मैनुलाइफ म्यूचुअल फंड के इक्विटी के मुख्य निवेश अधिकारी कृष्णा संघवी कहते हैं कि निवेशकों को असेट अलोकेशन का रास्ता अपनाना चाहिए। जो निवेशक कम समय के लिए निवेश चाहते हैं, उन्हें लालच पर रोक लगानी चाहिए। लंबे समय के निवेशक म्यूचुअल फंड के SIP में निवेश कर सकते हैं। उनका कहना है कि इस दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से है। यह अनुमान है कि 2030 तक हमारी अर्थव्यवस्था तीसरे नंबर पर आ जाएगी, जो अभी 7वें नंबर पर है। इक्विटी मार्केट लगातार इकोनॉमी की ग्रोथ पर चलता रहेगा।

घरेलू संकेत पॉजिटिव
कोटक सिक्योरिटीज के इंस्टीट्यूशनल हेड प्रतीक गुप्ता कहते हैं कि बाजार में तेजी बनी रह सकती है। घरेलू संकेत काफी पॉजिटिव हैं। वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज है और ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाएं कम हैं। इससे आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार भी बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से बाहर आ चुकी
ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के पीएमएस हेड आनंद शाह कहते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से बाहर आ चुकी है। कोरोना के दौरान आई ग्रोथ में तेज गिरावट अब जोरदार तेजी में बदल चुकी है। कोरोना काल छोड़ दिया जाए तो पिछले 4-5 साल से ग्रोथ का पहिया तेजी से घूम रहा है।

इस बीच कंपनियों के नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं। यानी शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों की ग्रोथ भी बेहतरीन रही है, जो आने वाले समय में भी जारी रह सकती है। जानकारों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में सेंसेक्स में शामिल कंपनियों की ग्रोथ 35% तक रह सकती हैं। वहीं अगले फाइनेंशियल ईयर (2022-23) में ये ग्रोथ 20% तक रह सकती है।

US फेड का ब्याज दरों में बदलाव न करने का फैसला
भारतीय बाजार की तेजी के कई कारण होंगे। खासकर बाजार को विदेशी निवेशकों से अच्छा सपोर्ट मिल रहा है। इसको अमेरिका और दूसरे देशों के सेंट्रल बैंक की तरफ से फैसलों से समझा जा सकता है। अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने अगले 6 महीने तक ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव न करने का फैसला किया है। दूसरे देशों में भी ब्याज दरें या तो निगेटिव हैं या बेहद कम। ऐसे में विदेशी निवेशक ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए दूसरे देशों में निवेश कर रहे हैं। इनमें भारतीय बाजार रिटर्न के लिहाज से उन्हें बेहतरीन लग रहा है।

पहले विदेशी निवेशक (FII) अगर बाजार से पैसे निकालते थे, तो बाजार में तेज गिरावट आती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं, गुरुवार को ही FII ने बाजार में केवल 358 करोड़ रुपए डाले जबकि उनके मुकाबले म्यूचुअल फंड्स यानी घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1750 करोड़ रुपए का निवेश किया। घरेलू संस्थागत निवेशक अब भारतीय बाजार की गिरावट और बढ़त में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कोरोना के बीच इतनी तेजी से क्यों बढ़ा बाजार?
साल 2020 के मार्च में लगे पहले लॉकडाउन ने बाजार को जबरदस्त प्रभावित किया। इस दौरान सेंसेक्स 25,681 के लेवल पर गया तो लगा कि यहां से उबरने में बाजार को काफी समय लगेगा। पर जैसा कि सरकार ने भी आपदा में अवसर तलाशने की बात कही तो बाजार ने उससे आगे का अवसर तलाशा। यह अवसर था नए रिकॉर्ड का, निवेशकों की कमाई का, कंपनियों की कमाई का और मजबूत IPO के बाजार का।

भारतीय कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन
कोरोना के दौरान बाजार की बढ़त का सबसे बड़ा कारण था, भारतीय कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन। मार्च के अंतिम हफ्ते में लगे लॉकडाउन के बाद मई से ही अर्थव्यवस्था खुलने लगी थी, जब फ्लाइट्स का आवागमन शुरू कर दिया गया था। कोरोना के दौरान अर्थव्यवस्था भले प्रभावित हुई, लेकिन मई 2020 के बाद से ही इसके पॉजिटिव संकेत नजर आने लगे थे।

कोरोना के दौरान बाजार ने बेहतरीन प्रदर्शन किया
कोरोना के दौरान बाजार ने जो बेहतरीन प्रदर्शन किया उसके कई कारण रहे। कोरोना को कंट्रोल में लाने में सफलता, कंपनियों का रिकॉर्ड प्रॉफिट, विदेशी निवेशकों का रुझान, IPO बाजार की तेजी और कंपनियों द्वारा पैसा जुटाने जैसे कारण रहे हैं। सरकार और रिजर्व बैंक ने इस दौरान खुलकर अर्थव्यवस्था के लिए काम किया और राहत पैकेज दिए। पिछले साल जुलाई से दिसंबर के बीच 3,095 कंपनियों का प्रॉफिट 1.45 लाख करोड़ रुपए रहा, जिसने कई सालों के रिकार्ड को तोड़ दिया। पहली बार भारत के सभी सरकारी बैंकों ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में फायदा कमाने का रिकॉर्ड बनाया।

बाजार बढ़ने के दौरान नए निवेशक कितने आए?
निवेशकों की संख्या अगस्त 2020 में 5.37 करोड़ से बढ़कर अब 8 करोड़ हो गई है। जहां तक निवेशकों की बात है तो सबसे ज्यादा निवेशक महाराष्ट्र, गुजरात और फिर दिल्ली से आते हैं। हालांकि कोरोना में यह रुझान बदला तो नहीं, पर छोटे शहरों से भी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने लगी। निवेशकों की संख्या बढ़ने के मामले में महाराष्ट्र गुजरात पीछे हो गए जबकि छोटे राज्य आगे हो गए।

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