पाली
पितृपक्ष के 15 दिनों में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध किया जाता है। इन दिनों लोग अपने पूर्वजों के लिए शांति की कामना करते हुए दान-पुण्य और कई धार्मिक कार्य करते हैं। दैनिक भास्कर पितृपक्ष में उन लोगों की कहानी लेकर आ रहा है, जिन्होंने अपने माता-पिता या पूर्वजों की याद में समाज में परिवर्तन लाने वाले कार्य कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है। पाली जिले के एक ऐसे व्यक्ति से मिलवाते हैं, जिसने विदेश में रहते हुए भी माता-पिता के लिए अपने गांव में करोड़ों रुपए खर्च कर ग्रामीणों के लिए सुविधाजनक अस्पताल, स्कूल और गोशाला का निर्माण करवाया।

घाणेराव के मोहनीदेवी-जुगराज हिंगड़ राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बना वार्ड।
घाणेराव गांव के मूल निवासी महेशचंद हिंगड़ डायमंड ब्रोकर हैं। वर्तमान में बैंकॉक (थाईलैंड) में रह रहे हैं। वर्ष 1994-95 की बात है, पाली जिले के छोटे से घाणेराव गांव में ज्यादा चिकित्सा सुविधा नहीं होती थी। शाम ढलने के बाद गांव में यातायात के साधन भी नहीं मिलते थे। एक बार एक गर्भवती को प्रसव के लिए सादड़ी अस्पताल ले जाना था, तब जुगराज हिंगड़ अपनी कार से उन्हें वहां लेकर गए।