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कमजोरी और थकान लगे पर बुखार न आए तो भी हो सकता है डेंगू

देशभर में कोरोना संक्रमण के मामलों में फिलहाल काफी कमी देखी जा रही है, इस बीच डेंगू बुखार ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों से डेंगू के प्रकोप की खबरें सामने आ रही हैं। डेंगू के बढ़ते मामलों के कारण कई स्थानों पर अस्पतालों में बेड कम होने लग गए हैं जिससे लोगों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। देश में सितंबर-अक्तूबर के महीने में अक्सर डेंगू के मामले बढ़ जाते हैं। मच्छरों के काटने से फैलने वाली इस बीमारी में तेज बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द के साथ उल्टी होना सामान्य लक्षण माना जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू के मरीजों को हर बार तेज बुखार हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई लोगों में बिना बुखार के कमजोरी और थकान की स्थिति में भी डेंगू का निदान किया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक जिस तरह से देश के कई हिस्सों में डेंगू के मामलों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है ऐसे में लोगों को बिना बुखार वाले डेंगू से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। इस तरह के डेंगू को ‘एफेब्रिल डेंगू’ कहा जाता है, जो अपेक्षाकृत अधिक घातक हो सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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