हनुमानगढ़.दिल्ली से लाई गई 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को एक लाख रुपए में खरीदकर देह व्यापार के धंधे में धकेलने के बहुचर्चित मामले में पोक्सो न्यायालय के न्यायाधीश ने मुख्य आरोपी रैकेट सरगना मंजू अग्रवाल सहित पांचों दोषियों को सजा सुनाई। न्यायालय ने गुरुवार को मंजू अग्रवाल, उसकी पुत्रवधू सोनू अग्रवाल व पुत्र मुकेश अग्रवाल को धारा 347 के तहत तीन वर्ष की सजा व 500 रुपए जुर्माना, अदम अदायगी की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने के आदेश दिए। इसके अलावा इन तीनों को धारा 328 के तहत पांच वर्ष की सजा व दो हजार रुपए जुर्माना, धारा 368 के तहत तीन वर्ष की सजा व पांच सौ रुपए जुर्माना, धारा 376(2) (एन), 376(डी), सहपठित धारा 109 भादंसं व 5जी व 5एल/17 पोक्सो एक्ट के तहत दस वर्ष की सजा व 50 हजार रुपए का जुर्माना व अदम अदायगी की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं पीटा एक्ट की धारा तीन के तहत एक वर्ष, धारा पांच के तहत तीन व धारा छह के तहत सात वर्ष का कारावास व इन तीनों धाराओं के तहत 2-2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। अदम अदायगी की स्थिति में छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले मेें जगतार सिंह और गुरजंट सिंह को धारा 376, 376(डी), 5जी, 5एल/6 पोक्सो एक्ट के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास, 50 हजार रुपए का जुर्माना और अदम अदायगी की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने के आदेश दिए। इसके अलावा इन दोनों को धारा 377 के तहत 10 वर्ष की सजा सुनाई। 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। अदम अदायगी की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जंक्शन के सुरेशिया क्षेत्र में देह व्यापार करवाने के बहुचर्चित मामले की करीब चार वर्ष से कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। इस मामले में कुल 19 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया था। अंतिम सुनवाई में पांच आरोपियों को दोषी करार दिया गया। इस मामले में पीडि़ता के बयानों व अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में दो अप्रेल 2017 को महिला थाने में मामला दर्ज करवाया गया था। इसमें पीडि़ता ने सुरेशिया क्षेत्र की निवासी मंजू अग्रवाल सहित अन्य लोगों पर देह व्यापार करवाने का आरोप लगाया था। पीडि़ता आरोपियों के चंगुल से बचकर किसी तरह पड़ौसी के यहां पहुंची थी। वहां से पीडि़ता की ओर से पुलिस को सूचना देने पर बाल कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में आगे की जांच प्रक्रिया शुरू हुई थी। महिला थाने में पहली बार दर्ज एफआईआर में दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच में नौ अन्य लोगों को आरोपी माना गया था। दिल्ली से नाबालिग लड़की को यहां लाकर उससे देह व्यापार करवाने के मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए थे। पीडि़ता के बयान के आधार पर अड्डा संचालिका व मुख्य आरोपी मंजू अग्रवाल, सोनू अग्रवाल, मुकेश कुमार, जगजीत सिंह, काला उर्फ अमरजीत, गुरंजट सिंह, विजय कुमार, नवीन खान, मंजूर खान, पूर्णचंद, प्रताप सिंह, रामचंद्र उर्फ फौजी, सुनील कुमार, अख्तर खान, महेंद्र कुमार, दीपक कुमार, जगदीश, किशन लाल व गुड्डी देवी आदि के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। सभी आरोपियों के खिलाफ चालान पेश करने के बाद कोर्ट में इसकी सुनवाई चार वर्ष से चल रही थी। गुरुवार को इस प्रकरण में फैसला दिया गया। नाबालिग लड़की से दुष्कर्म व देह व्यापार करवाने के मामले में कई आरोपियों एवं उनके परिजनों ने तत्कालीन बाल कल्याण समिति अध्यक्ष पर जमानत करवाने व मामले से नाम निकलवाने की एवज में पैसे मांगने के आरोप लगाए थे। इस संबंध में जंक्शन थाने में मामला भी दर्ज करवाया गया था। वहीं पीडि़ता की ओर से स्थानीय पुलिस को घटना की सूचना देने पर स्थानीय पुलिस ने दिल्ली में कार्रवाई होने की बात कह कर मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था। विभिन्न जागरूक संगठनों ने इसे लेकर आंदोलन किया। इसके बाद पीडि़ता के बयान के आधार पर महिला पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। जबकि सूचना मिलने पर तत्कालीन बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जोधा सिंह व उनकी टीम की मौजूदगी में ही पीडि़ता ने मीडिया के समक्ष अपनी पीड़ा बताई थी। इसके बाद जन संगठनों ने प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया था।