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मूंग की सरकारी खरीद में अड़ंगा लगाने वाले वेयरहाउस के मैनेजर को हटाने की मांग, किसानों द्वारा रास्ता जाम

अडेंगेबाजी के कारण किसानों को हो रहा है प्रति क्विंटल 1200 रुपए तक का नुकसान
श्रीगंगानगर।
जिले में मूंग की सरकारी समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद में सरकार का एक आदेश बड़ी अडेंगेबाजी का कारण बन गया है,जिसके चलते किसानों को प्रति क्विंटल 1200 रुपए तक का नुकसान हो रहा है।इससे तंग आए किसानों ने आज जिले के घमूडवाली थाना क्षेत्र में रिडमलसर डालने वाला मार्ग पर ट्रैक्टर ट्रालियां खड़ी कर धरना लगा दिया। अखिल भारतीय किसान सभा के नेता रविंद्र तरखान ने बताया कि इस आदेश की वजह से किसानों को हो रहे नुकसान को देखते हुए यह धरना लगाया गया है। किसानों में इसे लेकर भारी आक्रोश है। किसान प्रतिनिधियों से बातचीत करने के लिए तहसीलदार व अन्य अधिकारी पहुंचे, लेकिन देर शाम तीसरे दौर की वार्ता में सहमति बनने पर 1 दिसंबर तक के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया गया। दिनभर इस मार्ग पर ट्रैक्टर ट्रॉलियों को खड़ा कर किसान नेता रविंद्र तरखान, बलराम नैण, सुखदेवसिंह, नछत्तरसिंह बुट्टर, कुलविंदरसिंह,मंगासिंह समरा, हरीकृष्ण, विकास नैन, महेंद्र गोदारा,वीरेंद्रसिंह शेरगिल, राजपालसिंह, हंसराज गोदारा और सुरेंद्र गोदारा आदि डटे हुए थे। यह किसान मांग कर रहे हैं कि रिडमलसर क्षेत्र में वेयरहाउस के मैनेजर को हटाया जाए क्योंकि वही मूंग की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीद में बाधा बना हुआ है। किसान नेता सुखबीर सिंह फौजी ने कहा कि मूंग के दाने-दाने की एमएसपी पर खरीद करवाने के लिए किसान संघर्ष को तेज करेंगे। जिला प्रशासन को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। सुबह 11 बजे धरना लगने से पहले ही लालेवाला-भगवानगढ़ को जोड़ने वाली इस मुख्य सड़क पर काफी संख्या में पुलिस तैनात कर दी गई,लेकिन फिर भी किसान ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर पहुंच गए।मूंग से लदी हुई कुछ ट्रैक्टर ट्रॉलियों को कल देर रात ही किसानों ने यहां रोकना शुरू कर दिया था। रविंद्र तरखान ने पूरे मामले की जानकारी देते बताया कि इस इलाके में नैफेड द्वारा मूंग की खरीद की जा रही है। कहीं-कहीं मूंग की गुणवत्ता कम होने के कारण खरीद एजेंसी के अधिकारी व कर्मचारी उसे रिजेक्ट कर देते हैं, लेकिन इनके द्वारा खरीद की गई मूंग को जब वेयर हाउस के गोदाम में भेजा जाता है, तो वहां मैनेजर द्वारा फिर से माल की गुणवत्ता परख की जाती है। दोबारा जांच में अगर गुणवत्ता सही न मानते हुए मूंग रिजेक्ट कर दी जाती है, तो फिर रिजेक्ट की हुई मूंग किसान को वापस नहीं की जाती। सरकार का आदेश है कि रिजेक्ट की हुई मूंग को नीलामी से बेचा जाए। नीलामी में जो भाव आएगा और एमएसपी का जो भाव है, उसकी अंतर राशि वह अधिकारी अथवा कर्मचारी वहन करेगा, जिसने इसकी शुरू में खरीद की है। रविंद्र तरखान के अनुसार सरकार का यही आदेश है मूंग की एमएसपी पर खरीद में बाधा बन गया है क्योंकि खरीद करने वाले अधिकारी व कर्मचारी शुरू में ही मूंग को खरीदने से ही इनकार कर देते हैं। उनको यह डर रहता है कि खरीद कर वेयर हाउस में भेजी गई मूंग अगर रिजेक्ट हो गई तो बोली और एमएसपी के भावों के अंतर की राशि उनको वहन करनी पड़ेगी। इसलिए वे खरीद करते ही नहीं चाहे मूंग की गुणवत्ता बहुत अच्छी भी क्यों ना हो। रविंद्र तरखान ने बताया कि रिडमलसर क्षेत्र में पिछले 15 दिनों में 50-50 किलो मूंग के सिर्फ 36 कट्टे ही खरीदे गए हैं। पदमपुर मंडी क्षेत्र में आज 12 ट्रैक्टर ट्रॉली में से सिर्फ दो ट्रैक्टर ट्रॉली माल ही खरीदा गया है। सरकारी खरीद में यह बाधा उत्पन्न होने से किसानों को बहुत कम भाव में मूंग मंडी में बेचनी पड़ रही है। प्रति क्विंटल 12 सौ रुपए तक का उनको नुकसान हो रहा है। इस मसले को लेकर आज धरना स्थल पर किसान प्रतिनिधियों और तहसीलदार आदि अधिकारियों में दो-तीन दौर की वार्ता हुई, लेकिन हल नहीं निकला। रविंद्र तरखान में बताया कि वेयर हाउस का मैनेजर जानबूझकर अड़ंगा लगा रहा है। वह एमएसपी पर खरीदी गई मूंग को रिजेक्ट बताकर खारिज कर देता है। इसलिए मैनेजर को हटाने की मुख्य रूप से मांग की जा रही है। देर शाम रविंदर तरखान ने बताया कि तीसरे दौर की वार्ता में सहमति बन गई, जिस पर 1 दिसंबर तक के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया गया है।

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