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मानवाधिकार जिंदा रहने की संजीवनी

सीमा सन्देश न्यूज
श्रीगंगानगर।
दूरदर्शन के पूर्व उप महानिदेशक प्रो. डॉ. केके रत्तू ने कहा है कि मानवाधिकार जिंदा रहने की संजीवनी है। जब-जब दिल में संघर्ष का नाद बजता है, तब-तब मानवाधिकारों की बात होती है। वे शुक्रवार को यहां टांटिया विवि में विश्व मानवाधिकार दिवस पर आयोजित ‘मानवाधिकारों में मीडिया की भूमिका’ विषयक कार्यशाला को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।

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