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किसानों ने मंडी समिति कार्यालय का किया घेराव

हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)। व्यापारियों की ओर से मंडी समिति के साथ सांठगांठ कर अन्य राज्यों से सस्ते में अनाज मंगवा कर उसे समर्थन मूल्य पर एफसीआई को बेचने का आरोप लगाते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले किसानों ने गुरुवार को जंक्शन धानमण्डी स्थित कृषि उपज मण्डी समिति कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने कार्यालय के गेट के पास बैठकर जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों पर क्षेत्र के किसानों का गेहूं नहीं खरीदने का आरोप लगाया। इस मौके पर सरपंच बलदेव सिंह ने कहा कि इलाके का किसान पिछले 20-20 दिनों से अनाज मण्डी में अपनी फसल लेकर बैठा है लेकिन गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं की जा रही। बारदाने की कमी बता गेहूं की फसल नहीं खरीदी जा रही। इससे किसानों में भारी रोष है। किसान नेता गुरपरविन्द्र सिंह मान ने कहा कि तीन-चार दिन पहले भी इस मामले को लेकर उन्हें मंडी समिति सचिव को ज्ञापन सौंप बताया था कि बाहरी राज्यों का गेहूं व्यापारियों की ओर से मंगवाकर समर्थन मूल्य पर एफसीआई को बेचा जा रहा है। तब सचिव ने कहा था कि उनके पास क्या सबूत है। आज हम सबूत के तौर पर किसानों से कम रेट पर खरीदी हुई गेहूं जो कि दूसरे राज्य से यहां के व्यापारी की ओर से लाई जा रही है उसकी चार ट्रॉलियां जोकि रात को मंडी के अंदर आई थी, उन्हें मंडी समिति सचिव के पास लेकर आए हैं। वहीं ओम स्वामी ने कहा कि किसानों से एमएसपी से कम रेट पर गेहूं खरीद कर यहां के व्यापारी एमएसपी 1975 रुपए पर एफसीआई को बेच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केन्द्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि विरोधी काले कानूनों का ही असर है। घेराव-प्रदर्शन के बाद किसान प्रतिनिधियों की मंडी समिति सचिव सीएल वर्मा के साथ उनके चैम्बर में वार्ता हुई। वार्ता में किसान प्रतिनिधि सरपंच बलदेव सिंह, ओम स्वामी, आमिर खान, गुरपरविन्द्र मान जबकि प्रशासन की ओर से मंडी समिति सचिव सीएल वर्मा, तहसीलदार दानाराम मीणा, एफसीआई के क्वालिटी इंस्पेक्टर, ठेकेदार व जंक्शन थाने के एसआई शैलेश चन्द मौजूद रहे। बैठक में तय हुआ कि राज्य से बाहर के किसानों का गेहूं एफसीआई की ओर से नहीं खरीदा जाएगा। जो गेहूं पहले से मंडी में आया है उसकी जांच होगी और जो भी दोषी पाया गया उस पर कार्रवाई होगी। घेराव-प्रदर्शन करने वालों में मुकद्दर अली, गुरुनायक सिंह, रामस्वरूप बागड़ी, करणवीर सिंह सहित कई किसान शामिल थे।

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