नई दिल्ली
कोविड महामारी की तीसरी लहर बैंकों पर भारी पड़ेगी। रेटिंग फर्म इक्रा ने आशंका जताई है कि महामारी को काबू में करने के लिए जो पाबंदियां लगाई जा रही हैं, उनके चलते न केवल बैंकों का मुनाफा घटेगा, बल्कि एसेट क्वालिटी को लेकर जोखिम भी बढ़ेगा। करीब सवा लाख करोड़ रुपए के लोन फंसने की आशंका है।
लोन 12 महीने तक के मोरेटोरियम के साथ रीस्ट्रक्चर किए
इक्रा के वाइस प्रेसिडेंट (फाइनेंशियल सेक्टर रेटिंग) अनिल गुप्ता ने बताया कि महामारी में विशेष सुविधा के तहत ज्यादातर लोन 12 महीने तक के मोरेटोरियम के साथ रीस्ट्रक्चर किए गए हैं। इनकी वसूली जनवरी-मार्च तिमाही से शुरू होनी है। अब महामारी की तीसरी लहर में संभव है कि ग्राहक लोन की वापसी शुरू न कर पाएं।
30 सितंबर 2021 तक बैंकों ने लोन रीस्ट्रक्चरिंग के 83% आवेदन स्वीकार किए थे। इसके चलते कुल 1.2 लाख करोड़ रुपए के लोन रीस्ट्रक्चर किए गए। चूंकि लोन रीस्ट्रक्चरिंग 31 दिसंबर 2021 तक की जानी थी, लिहाजा इसमें 1.5-2% बढ़ोतरी संभव है। इस बीच शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों के MD और CMD के साथ समीक्षा बैठक की।