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कोरोना के सभी वैरिएंट को रोकेगा एक टीका:अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बनाई सेकेंड जनरेशन वैक्सीन, चूहों पर ट्रायल सफल; अगले साल इंसानों पर होगा टेस्ट

वॉशिंगटन

कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट से परेशान दुनियाभर के लोगों के लिए अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने ऐसी वैक्सीन बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है, जो न सिर्फ कोविड-19 बल्कि कोरोना वायरस फैमिली के सभी खतरनाक वायरस से लड़ने में मदद करती है। वैज्ञानिक इस वैक्सीन का सफल ट्रायल चूहों पर कर चुके हैं। जिन चूहों पर इसका ट्रायल किया गया, वे SARS-CoV और कोरोना के दूसरे वैरिएंट से पीड़ित थे। उम्मीद है कि अगले साल तक इंसानों पर इसके ट्रायल शुरू कर दिए जाएंगे।

वैक्सीन को अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी ने डेवलप किया है। यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस का कोई भी नया रूप भविष्य में नई महामारी को जन्म दे सकता है। इस तरह के खतरे को रोकने के लिए ही उन्होंने इस वैक्सीन को बनाया है।

जानवरों से इंसानों में फैलने वाले हर वायरस पर असरदार
यूनिवर्सिटी की स्टडी को साइंस जर्नल में पब्लिश किया गया है। स्टडी में वैज्ञानिकों की खोज को सेकेंड जनरेशन वैक्सीन बताया गया है। ये वैक्सीन जानवरों से फैलने वाले वायरसों से इंसानों के इम्यून सिस्टम को सुरक्षित करती है। ये एक mRNA वैक्सीन है। वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन भी इस पद्धति पर काम करती है।

नई वैक्सीन सरबेकोवायरस पर हमला करती है। सरबेकोवायरस कोरोना वायरस फैमिली का हिस्सा है। सार्स और कोविड-19 भी इस फैमिली के ही वैरिएंट हैं। चूहों पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन ने कई ऐसी एंटीबॉडी बनाई हैं, जो स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ भी कारगर है। साउथ अफ्रीका में मिले B.1.351 वैरिएंट पर भी इस वैक्सीन में जोरदार असर दिखाया है।

क्या होता है स्पाइक प्रोटीन
कोरोनावायरस की बाहरी सतह पर क्राउन (मुकुट) की तरह दिखने वाला जो हिस्सा होता है, वहां से वायरस प्रोटीन को निकालता है। इसे स्पाइक प्रोटीन कहते हैं। इसी प्रोटीन से संक्रमण की शुरुआत होती है। यह इंसान के एंजाइम एसीई2 रिसेप्टर से जुड़कर शरीर तक पहुंचता है और फिर अपनी संख्या बढ़ाकर संक्रमण को बढ़ाता है।

बच्चों की वैक्सीन को मिल सकती है मंजूरी
कोरोना के स्वदेशी टीके कोवैक्सिन के बच्चों के लिए इस्तेमाल की मंजूरी सितंबर तक मिल सकती है। अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने उम्मीद जताई है। गुलेरिया ने कहा है कि बच्चों पर कोवैक्सिन के फेज-2 और फेज-3 के ट्रायल के डेटा सितंबर तक आ जाएंगे और उसी दौरान बच्चों के लिए वैक्सीन की मंजूरी भी मिल सकती है।

स्कूलों को खोलने पर विचार करना चाहिए: डॉ. गुलेरिया
डॉ. गुलेरिया का कहना है कि फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिलने पर यह बच्चों के लिए दूसरा विकल्प हो सकता है। वहीं कोरोना की तीसरी लहर की बात करें तो गुलेरिया इससे सहमत नहीं हैं कि तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि इस थ्योरी पर भरोसा करने की कोई वजह नहीं दिख रही।

गुलेरिया ने ये भी कहा है कि अब स्कूलों को खोलने पर विचार करना चाहिए, लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा कि शैक्षणिक संस्थान कहीं सुपर स्प्रेडर न बन जाएं। इसके लिए गुलेरिया ने सलाह दी है कि कंटेनमेंट जोन में स्कूलों को एक दिन छोड़कर एक दिन खोला जा सकता है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि बच्चे कोविड प्रोटोकॉल फॉलो करें।

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