श्रीगंगानगर। कांग्रेस के कई नेता नेहरू परिवार से छुटकारे की ख्वाहिश तो रखते हैं,लेकिन इनमे एक भी ऐसा नेता नहीं है जो नेहरू परिवार के किसी सदस्य के सामने नजर भी मिला सके।सब के सब भीगी बिल्ली बनकर रह जाते हैं।इन हालातों में कांग्रेस सोनिया अथवा राहुल या प्रियंका से निजात पा लेंगी,इसकी सम्भवना नजर नहीं आती।कार्यसमिति की बैठक से पूर्व जी-23 के सदस्य बदलाव को लेकर काफी उछल रहे थे।इन्होंने बाकायदा मुकुल वासनिक को अपना अध्यक्ष भी मान लिया था,लेकिन कार्यसमिति की बैठक में वासनिक का नाम पेश करना तो दूर रहा,कोई बोलने तक की हिम्मत तक नहीं जुटा पाया।सब भीगी बिल्ली की तरह चुपचाप सुनते रहे।ऐसे विद्रोह का क्या औचित्य,जिसे अमल करने से पार्टी के नेता खौफ खाते हो।विगत शुक्रवार को गुलाम नबी आजाद के घर हुई बैठक में नेतृत्व परिवर्तन पर सहमति बनी,लेकिन जब जी-23 के सदस्य कल शाम कार्यसमिति की बैठक में पहुंचे तो ये लोग अपना मुद्दा भूलकर सोनिया गांधी को बनाए रखने पर सहमत नजर आए। इन्होंने इसी आशय के प्रस्ताव को बिना किसी हील-हुज्जत के अपनी सहमति व्यक्त की।इससे यह जाहिर होता है कि भले ही सोनिया गांधी निष्क्रिय हो,लेकिन कोई भी नेता उनसे नजर मिलाकर बात करने की हिम्मत नही रखता है।यही एक सबसे बड़ी वजह है जिसके कारण कई साल से सोनिया अध्यक्ष पद पर काबिज हैं।कमोबेश यही स्थिति प्रियंका और राहुल की है।यदि इनके नाम का प्रस्ताव आता, तब भी कोई नेता इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं करता।इसी रुतबे और खौफ के कारण नेहरू परिवार का कांग्रेस का पूरे दमखम के साथ बीसियों साल से कब्जा है। यद्यपि सोनिया, राहुल और प्रियंका के प्रति पार्टी में आक्रोश तो बहुत था,लेकिन अशोक गहलोत ने बड़ी चतुराई के साथ कार्यसमिति की बैठक से पूर्व प्रेस के माध्यम से आलाकमान न केवल भरपूर पैरवी की बल्कि राहुल व प्रियंका का जमकर बचाव किया।इसकी वजह से उन लोगों के मंसूबों पर पानी फिर गया,जो बैठक में राहुल या प्रियंका के खिलाफ बोलने के इच्छुक थे। सच मे अशोक गहलोत जादूगर हैं। कल उन्होंने एक बार फिर अपने जादू का परिचय देते हुए संभावित तूफान को पहले ही शांत कर दिया।कल की भूमिका के बाद नेहरू परिवार में गहलोत का रुतबा और ज्यादा बढ़ गया। राहुल या प्रियंका भी अब गहलोत के अहसान से दबे दिखाई देने लगे हैं।कल तक जो लोग यह कह रहे थे कि गहलोत की कुर्सी जाने वाली है,उनके मंसूबो पर पानी फिर गया है।उनकी जादूगरी से सोनिया भी चमत्कृत है। लगता है कि आगामी विधानसभा चुनाव भी गहलोत के नेतृत्व में लड़ा जएगा ।