नई दिल्ली
सरकार ने कहा है कि ड्रग्स सेवन को अपराध की श्रेणी से हटाने का उनका कोई इरादा नहीं है। बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन कांग्रेसी विधायक प्रियोदत्त बोरदोलोई के सवाल का लिखित जवाब देते हुए राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने ये बात कही। बोरदोलाई ये जानना चाहते थे कि क्या सरकार एनडीपीएस एक्ट में बदलाव कर ड्रग्स के व्यक्तिगत इस्तेमाल को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने पर विचार कर रही है? दरअसल मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस ने प्रस्ताव दिया था कि ड्रग्स लेने वाले के साथ अपराधी जैसा नहीं बल्कि पीड़ित जैसा व्यवहार करना चाहिए।
पिछले साल अक्टूबर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने एनडीपीएस एक्ट में संशोधन कर कम मात्रा में ड्रग्स रखने वाले या ड्रग्स इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपराधी की श्रेणी में ना रखने का प्रस्ताव रखा था। वहीं सरकार ने दिसंबर में शीतकालीन सत्र के दौरान एनडीपीएस एक्ट-1985 में संशोधन विधेयक पारित किया था जिसके मुताबिक ड्रग्स से संबंधित गैरकानूनी काम में पैसा लगाना या ड्रग्स से जुड़े मामले में शामिल होने को आपराधिक श्रेणी में रखा गया था। ड्रग्स का इस्तेमाल करना अपराध है लेकिन एनडीपीएस एक्ट उन लोगों को छूट देता है जो नशा मुक्ति केंद्र जाना चाहते हैं।
बोरदोलोई के एक और सवाल का जवाब देते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार 2014 से 2021 तक ड्रग्स कंट्रोल को लेकर बनाए राष्ट्रीय फंड में 11 करोड़ से ज्यादा फंड दे चुकी है। इस फंड से देशभर में नशा मुक्ति कार्यक्रम चलाए जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि देश के बड़े मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में नशा मुक्ति अभियान पर इस फंड का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने में भी इस फंड का इस्तेमाल किया जाता है।