मुंबई
निर्देशक सत्यजीत रे की गिनती भारत के महान निर्देशकों में होती है। 2 मई को सत्यजीत रे की 101वीं बर्थ एनिवर्सिरी है। सिनेमा को लेकर उनका जो जुनून था उसने भारतीय सिनेमा को बदल दिया। सत्यजीत रे को 36 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। सिनेमा में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें पद्मभूषण और भारत रत्न से सम्मानित किया गया। केवल देश में ही नहीं पूरी दुनिया ने उनकी इस प्रतिभा लोहा माना। बंगाली परिवार में जन्मे सत्यजीत रे एक निर्देशक होने के साथ-साथ लेखक, स्क्रिप्ट राइटर, गीतकार, संगीकार और मैगजीन के एडिटर थे। आज इस खास मौके पर बताते हैं सत्यजीत रे से जुड़ी कुछ खास बातें।
सत्यजीत रे की फिल्मी यात्रा
-सत्यजीत रे की पहली फिल्म 1955 में ‘पाथेर पंजाली‘ आई थी। फिल्म को 11 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। इसके बाद उनकी ‘अपराजितो‘, ‘अपूर संसार‘, ‘तीन कन्या‘ और ‘शतरंज के खिलाड़ी‘ के जैसी शानदार फिल्में आई।
-1943 में सत्यजीत रे ने ब्रिटिश विज्ञापन एजेंसी डीजे केमेर में काम करना शुरू किया। यहां वह जूनियर विजुअलाइजर थे। एजेंसी में काम करने के उन्हें महीने के 80 रुपये मिलते थे।
– चिदानंद दासगुप्ता और अन्य लोगों के साथ मिलकर 1947 में उन्होंने कलकत्ता फिल्म सोसाइटी की स्थापना की। वहां कई विदेशी फिल्में दिखाई गईं जिनमें से बहुत सी सत्यजीत रे ने देखी और सिनेमा की दुनिया की बारीकियों को समझने लगे।
-1949 में फ्रेंच डायरेक्टर जीन रेनॉयर कलकत्ता अपनी फिल्म ‘द रीवर’ की शूटिंग के लिए आए थे। उस वक्त सत्यजीत रे उनसे मिले और उन्हें ‘पाथेर पांचाली‘ की कहानी के बारे में बताया। रेनॉयर ने उनके इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद की।