जयपुर
जयपुर नगर निगम ग्रेटर के लिए 28 जून का दिन बेहद अहम है। सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बैंच अपना वो फैसला सुनाएगी, जिससे यह तय होगा कि आगे जयपुर नगर निगम ग्रेटर का मेयर कौन रहेगा। मेयर पद से निलंबित हुई सौम्या गुर्जर की याचिका पर आने वाले इस फैसले से पहले राजधानी में सियासत भी गर्मा गई है। शनिवार को अपने पर हमले की आशंका जताने और विरोधियों को निशाना साधने के बाद कार्यवाहक मेयर शील धाभाई आज मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र में दौरे पर गई। जहां उन्होंने पार्षद स्वाति परनामी के निवास पर करीब आधे घंटे तक विधायक कालीचरण सराफ से मुलाकात की।
वैसे तो मेयर का ये दौरा रुटीन बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सुनने और उसके निस्तारण के लिए यह दौरा किया है, लेकिन कार्यवाहक मेयर बनने के बाद शील धाभाई का ये दूसरा मालवीय नगर क्षेत्र का दौरा है। हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले मेयर के इस दौरे को राजनैतिक भी माना जा रहा है। मेयर का चार्ज संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया था, लेकिन वहां के कई पार्षदों ने उनसे दूरी बनाए रखी थी। उसके बाद वे मालवीय नगर दौरे पर गई थी। वहीं, शीलधाभाई ने अब तक सांगानेर, बगरू और झोटवाड़ा क्षेत्र का दौरे नहीं किया, जो ग्रेटर के एरिया में ही आते है।
7 जून को बनाया था कार्यवाहक मेयर
सौम्या गुर्जर के निलंबन के अगले ही दिन 7 जून को सरकार ने शील धाभाई को जयपुर ग्रेटर का कार्यवाहक मेयर बनाया था। इसके अगले ही दिन धाभाई ने कार्यवाहक मेयर की कुर्सी संभाल ली थी। उसी दिन सौम्या के निलंबन का पूरे प्रदेश में भाजपा पार्टी ने विरोध जताया था, लेकिन धाभाई ने उस विरोध से खुद को दूर रखते हुए मेयर का पदभार ग्रहण किया था।
आयुक्त से विवाद के बाद हटाया था सौम्या को
जयपुर नगर निगम में 4 जून को पूर्व मेयर सौम्या गुर्जर के चैंबर में हुई एक बैठक के दौरान ये पूरा विवाद खड़ा हुआ था। तब नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह ने मेयर के चैम्बर में खुद के साथ मारपीट होने और बदसलूकी करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार को शिकायत की थी। उन्होंने 3 पार्षदों के खिलाफ ज्योति नगर थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाया था। इस पूरे विवाद की सरकार ने एक RAS अधिकारी से जांच करवाकर 6 जून को तीनों पार्षदों अजय सिंह, पारस जैन और शंकर शर्मा के साथ सौम्या गुर्जर को भी पद से निलंबित कर दिया था। साथ ही सरकार ने मेयर के खिलाफ न्यायिक जांच भी शुरू करवा दी।
सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
सरकार के निलंबन के फैसले को सौम्या गुर्जर ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर 14 जून को सुनवाई हुई। करीब 3 घंटे तक चली सुनवाई के बाद जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस सीके सोनगरा की खंडपीठ ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। ऐसे में अगर सरकार के आदेश पर कोर्ट से स्टे आता है तो सौम्या फिर से मेयर की कुर्सी संभालेगी। वहीं अगर स्टे नहीं आता और याचिका खारिज हो जाती है तो शील धाभाई का कार्यकाल जारी रहेगा।
हमले के मामले में विरोधियों पर साधा था निशाना
शनिवार को शील धाभाई के अजमेर रोड हीरापुरा स्थित निवास के बाहर जो घटनाक्रम हुआ उसके बाद उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा था कि जिनको मुझसे परेशानी है या जिनके हित मुझसे टकरा रहे होंगे शायद वही ऐसा कर रहे है। उन्होंने कहा था कि मेरा जनता से कोई बैर नहीं है और मैं यहां पिछले 15 साल से रह रही हूं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग लोग निगरानी भी रख रहे है। इसी कारण मुझ पर हमले की साजिश से ये युवक भेजे गए।
हालांकि, शील धाभाई के इन आरोपों का जयपुर पुलिस आयुक्त आनन्द श्रीवास्तव ने खंडन कर दिया था, उन्होंने बयान देते हुए कहा था कि जो युवक मेयर हाउस के पास से पकड़ा गया है, उसका अजमेर रोड स्लिप लाइन पर मोटरसाइकिल और स्कूटर सवार के बीच कट मारने की बात को लेकर विवाद हुआ था। उसी से बचने के लिए वह भागकर मेयर हाउस के पास खाली प्लाट में आकर छिप गया था, जिसे बाद में मेयर के सुरक्षा गार्ड और ड्राइवर ने पकड़ लिया था। कमिश्नर का कहना है कि मेयर के ड्राइवर ने थाने में लिखित में दिया है कि ना कोई हमला हुआ है ना तोड़फोड़।
पूनिया, राठौड़ ने की हमले की निंदा
शनिवार को अजमेर रोड हीरापुरा स्थित आवास पर हुई घटना के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने गहलोत सरकार पर निशाना साधा है। पूनिया ने कहा कि प्रदेश की राजधानी जयपुर ग्रेटर की प्रथम नागरिक तक सुरक्षित नहीं। यह गहलोत जी के अपराध राज की खुली बानगी है, जिनके राज में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, जनप्रतिनिधि तक सुरक्षित नहीं है। कार्यवाहक महापौर शील धाबाई के घर के बाहर हुए हमले की घोर निंदा करता हूं।
राठौड़ ने कहा कि विगत माह मई में भरतपुर में सांसद पर जानलेवा हमले के बाद अब जयपुर ग्रेटर की कार्यवाहक महापौर शील धाभाई जी के घर के बाहर हमला गहलोत सरकार की लचर कानून व्यवस्था का जीता-जागता प्रमाण है। बेखौफ बदमाशों लगातार जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाकर उन पर हमला किया जा रहा है।