आयुक्त को भेजा तीन में से एक ग्रुप की नहरें चलाने का प्रपोजल
by seemasandesh
अनुमोदन के बाद 4 जून से आईजीएनपी में लागू होगा सिंचाई पानी वितरण का रेगुलेशन हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)। करीब दो माह की बंदी के बाद इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 4 जून से सिंचाई पानी वितरण का रेगुलेशन लागू हो जाएगा। तीन में से एक ग्रुप की नहरें चलाने का चक्रीय कार्यक्रम तय कर अनुमोदन के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से सिंचित क्षेत्र विकास आयुक्त बीकानेर को भेजा गया है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण की नहरों को तीन ग्रुपों में बांटकर एक साथ एक ग्रुप की नहरें चलाई जाएंगी। यानी किसानों को सिंचाई के लिए 25 दिन के अंतराल से पानी मिलेगा। जल संसाधन विभाग की ओर से रेगुलेशन निर्धारण की तैयारी शुरू कर दी गई है। जून माह के लिए आईजीएनपी का शेयर 9650 क्यूसेक तय है। मई के लिए 7 हजार क्यूसेक पेयजल के लिए निर्धारित था जो वर्तमान में हरिके बैराज से मिल रहा है। जून के लिए तय शेयर के अनुसार पौंग बांध से 2650 क्यूसेक पानी और बढ़ा दिया जाएगा। चार दिन बाद बढ़ा हुआ पानी जिले में प्रवेश कर जाएगा। 4 जून से रेगुलेशन लागू कर सिंचाई के लिए पानी शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि किसान प्रतिनिधि इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में फसलों की बिजाई के लिए नहरों को चार में से दो ग्रुप में बांटकर सिंचाई पानी देने की मांग कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता अमरजीत मेहरड़ा ने बताया कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना में तीन में एक समूह चलाने का प्रपोजल आयुक्त को भिजवाया गया है। 4 जून को रेगुलेशन जारी किए जाने की संभावना है। वर्तमान में आईजीएनपी में पीने का पानी चल रहा है। अनूपगढ़ ब्रांच में 1500 क्यूसेक पानी चल रहा है। जैसलमेर तक पीने का पानी चल रहा है। रेगुलेशन शुरू होने के बाद पीने के पानी को भी प्राथमिकता दी जाएगी ताकि इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में पीने के पानी की किल्लत न हो। उन्होंने बताया कि क्लोजर के तुरंत बाद इस बार तीन में से एक ग्रुप का पानी 4 जून से ही दे दिया है। पेयजल के लिए 25-26 मई को ही पानी पहुंचा था। पेयजल की मांग भी पूरी की और सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध करवा दिया। गौरतलब है कि आईजीएनपी में 20 मार्च को सिंचाई पानी का रेगुलेशन समाप्त हुआ था। 20 मार्च से 25 अप्रेल तक पेयजल आपूर्ति हुई। इसके बाद रिलाइनिंग के लिए पूर्ण बंदी ली गई थी। 23 मई रात्रि को हरिके से छोड़ा गया पानी 25 मई को हनुमानगढ़ पहुंच गया था। अब तक पेयजल भंडारण करवाया जा रहा है।