जयपुर
प्रदेश में कोरोना संक्रमण की धीमी रफ्तार को देखते हुए राजस्थान सरकार के निर्देशों के बाद तीन महीने से बंद सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के कपाट सोमवार सुबह से श्रद्धालुओं के लिए रोजाना शाम 4 बजे तक खोल दिए गए हैं। अलसुबह 5 बजे से ही अपने आराध्य देवी-देवताओं के दर्शनों के लिए मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। इस बीच जयकार गूंजते रहे। पुलिस और मंदिर प्रशासन के सेवकों द्वारा दर्शनार्थियों से मास्क लगाए रखने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील चलती रही, लेकिन श्रद्धा के सैलाब में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम को लोग भुला बैठे और दर्शनों की होड़ में लगे रहे।

जयपुर के आराध्य श्री राधा गोविंद देवजी मंदिर
जयपुर में कपाट 5 बजे से खुले, लेकिन एंट्री 7 बजे से
जयपुर के प्रमुख गोविंद देव जी मंदिर, मोतीडूंगरी गणेश मंदिर, ताड़केश्वर महादेव मंदिर, चांदपोल हनुमान मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में सुबह 5 बजे से मंदिर के कपाट खुले। लेकिन भक्तों को दर्शन करने की अनुमति सुबह 7 बजे बाद मिली। महंत अंजन गोस्वामी ने बताया कि आगामी दिनों तक गोविंद देव मंदिर में मंगला आरती, ग्वाल, संध्या और शयन की झांकियों में दर्शनार्थियों का प्रवेश बंद रखा जाएगा।
सुबह पौने 8 बजे से सुबह 11:30 बजे मंदिर में दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसी तरह, अन्य मंदिरों में भी दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग समय तय किया हुआ है। सोमवार को मंदिरों के खुलने से पहले जयपुर सहित अन्य सभी जिलों में कलेक्टरों ने मंदिर प्रशासन और पुलिस अफसरों के साथ मौका निरीक्षण किया। जयपुर में कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा गोविंददेव पहुंचे। मंदिर परिसर को सैनेटाइज किया गया। प्रदेश में सभी प्रमुख मंदिर 16 अप्रैल को दर्शन के लिए बंद किए गए थे।

राधा गोविंद देवजी मंदिर जयपुर
अजमेर में ख्वाजा की दरगाह, पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर और सांवलिया सेठ भी खोले गए
अजमेर के पुष्कर में विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर और उदयपुर संभाग में सांवलिया सेठ का मंदिर भी दर्शनों के लिए 28 जून से खोले गए। मंदिरों में सुबह 5 बजे मंगला आरती की गई। जानकारी के अनुसार दोपहर 1:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक ब्रह्मा मंदिर विश्राम के दौरान दर्शन बंद रहेंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे से शाम 4 बजे तक मंदिर को खोला जाएगा।

अजमेर दरगाह भी खुली।
इसी तरह, सांवलिया सेठ मंदिर में शाम 4 बजे तक दर्शन होंगे। यहां सिर्फ उन्हीं श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। जिनको वैक्सीन की डोज लग चुकी है। इसी तरह, अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह को जियारत के लिए 28 जून को सुबह 5 बजे से खोला गया। यहां भी फूल और चादर चढ़ाने की मनाही है। दरगाह नाजिम अशफाक हुसैन ने बताया कि दरगाह में मौजूद रहने वाले खादिम जो दरगाह जियारत कराते है, उनके लिए कम से कम एक डोज लगाया जाना अनिवार्य है। इसके बिना वे दरगाह जियारत नहीं करा सकेंगे। इसके लिए भी व्यवस्थाएं की गई है।
कलेक्टर व एसपी ने किया निरीक्षण
अजमेर कलेक्टर प्रकाश राज पुरोहित व एसपी जगदीशचन्द्र शर्मा ने दरगाह का जायजा लिया और व्यवस्थाओं को देखा। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन के पालन को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने बताया कि दरगाह प्रबंधन से जुडे़ रोजमर्रा के लोगों, खादिमों व यहां तक कि स्टाफ व सिक्योरिटी गार्ड जो यहां मौजूद रहते हैं, उनको गाइडलाइन के अनुसार वैक्सीनेशन जरूरी है और इसके लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।

सांवलिया सेठ मंदिर में दर्शन
खाटूश्याम जी, सालासर, ऋषभदेव जी, करणी माता सहित कुछ प्रमुख मंदिर अभी भी बंद
आपको बता दें कि प्रदेश के प्रमुख ऋषभदेव मंदिर को नहीं खोला गया है। इस मंदिर को 31 जुलाई तक बंद रखा जाएगा। श्रद्धालु फिलहाल मंदिर की वेबसाइट पर ही दर्शन कर सकते हैं। इस साल 27 मार्च को मंदिर के कपाट बंद किए गए थे।

पुष्कर ब्रह्मा जी का मंदिर।
इसी तरह, सीकर जिले में खाटूश्याम जी, जीण माता और शाकंभरी मंदिर के अलावा सालासर बालाजी के मंदिर भी आमजन के दर्शनों के लिए बंद है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की मीटिंग के बाद ही आगामी दिनों में श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोलने का निर्णय किया जाएगा। वहीं, बीकानेर के देशनोक में करणी माता मंदिर, नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर के दर्शन भी आज नहीं खुले। यहां भी स्थानीय प्रशासन की अनुमति का इंतजार है। वहीं, बड़ा गणेश मंदिर को खोला गया।