मुंबई
उतार-चढ़ाव वाले बीते हफ्ते में निफ्टी ने 15,915 के लाइफ टाइम हाई को भी टच किया। लेकिन हफ्ते के 5वें कारोबारी दिन 15,800 के अहम लेवल से नीचे बंद हुआ। हालांकि, ब्रॉडर मार्केट में खासतौर पर स्मॉल कैप शेयरों ने अच्छा रिटर्न दिया।
2 जुलाई को समाप्त हफ्ते में सेंसेक्स और निफ्टी 0.80% तक फिसले। वहीं, BSE स्मॉलकैप इंडेक्स 2.2% चढ़ा। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक लॉकडाउन में रियायतों, कम ब्याज दरों और वैक्सीनेशन की रफ्तार से शेयर बाजार का सेंटीमेंट के चलते आगे मजबूत रहने की संभावना है।
ऐसे में अगले हफ्ते निवेशकों के लिए 5 इवेंट्स काफी अहम होंगे…
1.कोरोना वायरस और वैक्सीनेशन- देश में कोरोना के नए मामलों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। देश में शनिवार को कोरोना के 42,751 नए मरीजों की पहचान हुई। 51,775 ठीक हुए और 932 की मौत हो गई। इसके साथ ही एक्टिव केस, यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में 9,986 की कमी आई है। अब एक्टिव केस का आंकड़ा 5 लाख से कम हो गया है। हालांकि, नए डेल्टा वायरस से चिंताएं जरूर बढ़ी हैं।
2. क्लीन साइंस और GR इंफ्रा के IPO- प्राइमरी मार्केट में 7 जुलाई को 2 नई कंपनियों के पब्लिक इश्यू लॉन्च होंगे, जिसमें क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी और GR इंफ्राप्रोजेक्ट्स शामिल हैं। क्लीन साइंस का IPO साइज 1,546.62 करोड़ रुपए जुटाने की है। इसके लिए 880-900 रुपए प्रति शेयर प्राइस बैंड भी तय हैं। इसी तरह GR इंफ्रा भी 963 करोड़ रुपए का इश्यू लॉन्च करेगा। निवेशकों के लिए 828-837 रुपए प्रति शेयर प्राइस बैंड तय है। इन दोनों के अलावा इंडिया पेस्टिसाइड का शेयर एक्सचेंज पर 5 जुलाई को लिस्ट होगा।
3. नए फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजे- 2021-22 की जून तिमाही के नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। अगले हफ्ते टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस, डीमार्ट, डेल्टा कॉर्प, श्याम मेटालिक्स समेत अन्य कंपनियां तिमाही नतीजे जारी कर सकती हैं।
4. घरेलू मार्केट में विदेशी निवेश- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले हफ्ते 5,416.84 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,418.3 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। पूरे जून के लिहाज से देखें तो FII ने कुल खरीदे शेयरों से 25.89 करोड़ रुपए ज्यादा के शेयर बेचे। यानी नेट सेलर रहें।
5. रुपया और डॉलर – पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ और 2 महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया। 2 जुलाई को रुपया 56 पैसे कमजोर होकर 74.74 पर आ गया, जो 25 जून को 74.18 पर था। इसकी वजह ओपेक+ द्वारा कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने पर साफ स्थित न होना है। शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख करेंसियों के मुकाबले 3 महीने के सबसे ऊपरी लेवल पर पहुंच गया है।