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4 करोड़ के बदले 20 लाख रोकने का दावा, किया 3.95 करोड़ का भुगतान

श्रीगंगानगर (सीमा सन्देश न्यूज)। नगरपरिषद द्वारा खरीदे गए 64 आॅटोटीपर मामले में अधिकारियों द्वारा फर्म की 20 लाख से अधिक की राशि रोकने का दावा आयुक्त द्वारा पिछले दिनों किया गया था। जबकि हकीकत यह है कि नगरपरिषद द्वारा इन आॅटोटीपर की कुल लागत 4 करोड़ रुपए की दो प्रतिशत राशि भी नहीं रोकी गई। जबकि इस प्रकरण में हुई शिकायत के बाद प्रशासन ने अपनी जांच में नगरपरिषद के अधिकारी को दोषी माना था। इसके बावजूद इस प्रकरण ना तो प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही की गई और ना ही विभागीय।
परिणाम स्वरूप आॅटो टीपर उपलब्ध करवाने वाली फर्म को जुलाई माह में एक साथ 3 करोड़ 95 लाख 84 हजार रुपए का भुगतान कर डाला। इसमें भी रोचक बात यह है कि यह इसमें भी सबसे अधिक भुगतान 25 मार्च को 2 करोड़ 96 लाख 88 हजार रुपए एक ही दिन में किया गया। शेष 98 लाख 96 हजार रुपए 30 मार्च को हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने इस भुगतान को जिस वित्तीय वर्ष के बजट के एवज में आॅटोटीपर खरीद करने की निविदा आमंत्रित की। उस वित्तीय वर्ष में संबन्धित मद में इन्द्राज करने की जगह वित्तीय वर्ष 2021-2022 के रजिस्टर में इसकी इन्ट्री चढाई, जबकि नियमानुसार जिस वर्ष और जिस मद में सामान की खरीद या निविदा आमंत्रित की गई है। उसी मद और वित्तीय वर्ष के लेजर में भुगतान की गई राशि और उसकी दिनांक का विवरण दर्ज होता है।