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एक दशक से बंद है गंगाशहर का नया बस स्टैंड

गंगाशहर. नोखा रोड पर गंगाशहर नागरिक परिषद कोलकाता की ओर से 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित गंगाशहर का नया बस स्टैंड पिछले करीब एक दशक से राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की अनदेखी का शिकार है। निगम के उदासीन रवैये के चलते यहां से रोजाना जाने और आने वाले सैकड़ों यात्री मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशानी झेल रहे हैं जबकि निगम प्रशासन ने सभी सुविधाओं से युक्त भवन होने के बावजूद भी उसका उपयोग नहीं कर पिछले करीब एक दशक से इसके संचालन को बंद कर मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया । गंगाशहर नागरिक परिषद कोलकाता के प्रतिनिधि संपत लाल दुग्गड़ ने बताया कि 14 लाख रुपए की लागत से सभी सुविधाओं से युक्त एक भवन बनवा कर रोडवेज प्रशासन को सौंपा।

इस 14 लाख की राशि में जन सहभागिता योजना के तहत जिला प्रशासन की ओर से स्वीकृत 5 लाख रुपए की राशि भी शामिल है। दुग्गड़ ने बताया कि कुछ वर्षों तक तो यहां व्यवस्थाएं ठीक रही। बाद में धीरे-धीरे बस स्टैंड परिसर के अंदर बसों ने प्रवेश करना बंद कर दिया और हाईवे पर रुक कर ही सवारियां चढ़ाना उतारना शुरू कर दिया। यहां निजी और रोडवेज प्रशासन दोनों ही तरह की बसें रूकती है जिनमें रोजाना सैकड़ों यात्री आवागमन करते हैं। लॉकडाउन से पहले तक तो रोडवेज का कर्मचारी स्टैंड के बाहर टिकट की मशीन के साथ बाहर लगी अस्थाई दुकानों पर बैठकर यात्रियों को टिकट जारी करता दिख जाता था लेकिन यह व्यवस्था भी अब बंद हो गई है ।

जबकि नागरिक परिषद की ओर से बस स्टैंड परिसर में बने यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय में ठंडे पानी की मशीन, बैठने के लिए बेंचे तथा लाइट-पंखों की व्यवस्था है । दूगड़ ने बताया कि पिछले करीब एक दशक से यह बंद पड़ा हुआ है तथा इसमें सहयोग करने वाले भामाशाह भी इसकी दुर्दशा से निराश है। शहर जिला कांग्रेस के पूर्व विधानसभा के ए ब्लॉक के कार्यकारी अध्यक्ष मगन पाणेचा ने रोडवेज प्रशासन से तत्काल बस स्टैंड को शुरू करने के साथ जिला प्रशासन से वहां ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था कर यात्रियों के लिए समुचित सुविधाएं उपलब्ध करने की मांग की है।

बस स्टैंड के भीतर बसें नहींं जाती
&गंगाशहर बस स्टैंड पर रोडवेज का कार्मिक टिकटों की बुकिंग करता है। यहां से सवारियों को लेने और छोडऩे के लिए रोडवेज की बस रुकती भी है। यह सही है कि पिछले कुछ वर्षों से बस स्टैंड परिसर के अंदर बसें नहीं जाती। निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी के कारण यह निर्णय लेना पड़ा।

  • अंकित शर्मा, यातायात प्रबंधक, बीकानेर आगार

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