कोपेनहेगन। डेनमार्क में उत्तरी सागर के 1800 मीटर नीचे कार्बन डाइआॅक्साइड (सीओ2) को स्टोर करने की एक परियोजना का उद्घाटन किया गया। इस तरह डेनमार्क विदेशों से आयातित सीओ2 को दफनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। डेनमार्क के क्राउन प्रिंस फ्रेडरिक ने डेनमार्क के पश्चिम में एस्बर्ज शहर में उद्घाटन समारोह में कहा कि आज हमने उत्तरी सागर के लिए एक नया अध्याय, हरित अध्याय खोला है। वातावरण को और अधिक गर्म होने से रोकने के लिए सीओ2 कब्रिस्तान में कार्बन डाइआॅक्साइड इंजेक्ट किया जाता है। यह एक पुराने तेल क्षेत्र की साइट पर है। ब्रिटिश रासायनिक दिग्गज इनिओस और जर्मन तेल कंपनी विंटर्सहॉल डीए के नेतृत्व में ‘ग्रीन सैंड’ परियोजना से 2030 तक प्रति वर्ष 8 मिलियन टन तक सीओ2 स्टोर करने की उम्मीद है। अभी अपनी शैशव अवस्था में और महंगी, कार्बन कैप्चर व स्टोरेज (सीसीएस) परियोजनाओं का उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए सीओ2 को पकड़ना और फिर ट्रैप करना है। डेनिश अधिकारियों के अनुसार उन्होंने 2045 के प्रारंभ में कार्बन तटस्थता तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनके अनुसार हमारे जलवायु टूलकिट में यह एक जरूरी उपकरण है। इनिओस के सीईओ ब्रायन गिल्वरी ने इस अवसर पर कहा कि इस प्रकार की परियोजना के लिए उत्तरी सागर विशेष रूप से उपयुक्त है क्योंकि दशकों तक तेल व गैस उत्पादन के बाद इस क्षेत्र में पहले से ही पाइपलाइन और संभावित भंडारण स्थल हैं।