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पुलिस व आंदोलनकारी किसानों में झड़प, भाजपा नेताओं को रोका

पदमपुर (सीमा सन्देश) संयुक्त किसान मोर्चा के आह््वान पर भाजपा भगाओ-किसान बचाओ के तहत हुए कार्यक्रम में जिले भर से दो सौ से अधिक किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस व किसानों के बीच आठ घंटे तक तनातनी का माहौल बनने पर पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने हल्के बल का प्रयोग करना पड़ा। किसान नेता पहले 18 बीबी टोल नाका पर इकट्ठे हुए और वहां से कृषि कानूनों का विरोध करते हुए रोष मार्च निकालते हुए गणेशम पैलेस के बाहर पहले पुलिया फिर मुख्य गेट पर पहुंच गये। यहां पृथीपाल सिंह संधू, रणजीतसिंह राजू, संतवीर सिंह, श्योपत मेघवाल, रविन्द्र तरखान आदि किसान नेताओं ने हाथों में काले झण्डे लेकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नये कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर डटे रहे। जिला कार्यसमिति बैठक में विधायक बिहारीलाल बिश्नोई नोखा एवं संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष माधौराम चौधरी, डॉक्टर बृजमोहन सहारण सहित अन्य कार्यकर्ताओं को जब मीटिंग में जाने से रोका तो इसका भारी विरोध भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया। इस पर पुलिस व आंदोलनकारियों के धक्का-मुक्की व झड़पें होने से 1, 2 महिला कार्यकर्ताओं को चोटें भी लगी। पूर्व मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी व जिला अध्यक्ष आत्माराम तरड़, विधायक रामप्रताप कासनिया सूरतगढ़, विधायक संतोष बावरी अनूपगढ़ सहित अन्य नेताओं ने इस घटना की निंदा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इन्होंने किसान आंदोलन को एक प्रायोजित साजिश करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबको विरोध करने का अधिकार दिया है। किसी संगठन के कार्यकर्ताओं को संगठन का नेतृत्व करने से रोकना लोकतंत्र की हत्या के बराबर है।
भीषण गर्मी के बीच जिले से आरएसी व जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं 13 थानों का पुलिस दल बल के साथ मुस्तैद रहा। एडीएम भवानी सिंह श्रीगंगानगर, एसडीएम सुभाष कुमार, तहसीलदार सुशील कुमार सैनी सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। पृथ्वीपाल सिंह संधू ने कहा कि कृषि काले कानूनों के विरोध में पिछले एक साल से किसान दिल्ली की सड़कों पर आंदोलनरत हैं और 6 सौ से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं जोकि दुर्भाग्यपूर्ण बात है। देश के प्रधानमंत्री ने एक बार भी शहीद परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट नहीं की। किसानी को खत्म करने की साजिश बड़ी कंपनियों को आगे लाकर की जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में किसान बर्दाश्त नहीं करेगा।

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