Saturday, May 9निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

मनरेगा मजदूरों से आधी मजदूरी रिश्वत में लेने का भंडाफोड़

एसीबी ने सरपंच और उसके भाई को रंगे हाथ गिरफ्तार किया
श्रीगंगानगर।
जिले में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में श्रमिकों से उनकी मजदूरी का आधा हिस्सा रिश्वत के रूप में वापस लिए जाने का आज सुबह सवेरे भंडाफोड़ हुआ। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्रथम एवं द्वितीय चौकियों के प्रभारी डीएसपी वेदप्रकाश लखोटिया और डीएसपी भूपेंद्र सोनी ने आज सुबह लगभग 7 बजे पंचायत समिति सूरतगढ़ के अधीन ग्राम पंचायत चक 1- एलएम के सरपंच सतपाल मेघवाल (35) और उसके भाई रामप्रताप (46) निवासी गोपालपुरा को रिश्वत के रूप में 21 श्रमिकों की मजदूरी की आधी राशि 15 हजार 120 रुपए रिश्वत के रूप में लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। डीएसपी वेदप्रकाश लखोटिया ने बताया कि दोनों भाई भोपालपुरा के समीप अपनी ढाणी परिवादी अनिल बिश्नोई (27) निवासी चक 2 डीओ (बी)और सहपरिवादी सुरेश बिश्नोई (30) निवासी चक 3-सीएम से यह राशि लेते पकड़े गए। गिरफ्तारी के बाद दोनों को सुरक्षा की दृष्टि से नजदीक ही पुलिस की बिरधवाल चौकी में लाकर आगे की कार्रवाई की गई।

डीएसपी वेदप्रकाश लखोटिया ने बताया कि परिवादी अनिल बिश्नोई और सुरेश बिश्नोई ने 16 जुलाई को शिकायत करते हुए बताया कि उन के चक 2- डीओ(बी) में कच्ची सड़क का निर्माण मुरब्बा नंबर 25/01से 25/57 तक 8 मुरब्बा जमीन में किया जा रहा है। इस सरकारी कार्य में नियोजित कुल 28 मनरेगा श्रमिकों को मिलने वाली मजदूरी की राशि में से सरपंच द्वारा आधी राशि रिश्वत के रूप में मांगी जा रही है। डीएसपी के मुताबिक अनिल बिश्नोई की पत्नी सुमन इस ग्राम पंचायत में वार्ड पंच है। अनिल का कहना है कि सरपंच और उसका भाई लगातार कह रहे हैं कि अगर मजदूरी की आधी राशि उन्हें नहीं दी गई तो वे इस काम को रुकवा देंगे। इस शिकायत का एसीबी ने उसी दिन ही गोपनीय रूप से सत्यापन करवाया। इस में पुष्टि हो गई कि मजदूरी की आधी राशि रिश्वत में मांगी जा रही है। इसके बाद एसीबी ने कुछ दिन इंतजार किया था कि सडक निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान प्राप्त हो जाए। इन श्रमिकों के बैंक अकाउंट में विगत दिवस मजदूरी की राशि जमा हो गई। तत्पश्चात इसमें से आधी राशि लेने के लिए सरपंच और उसके भाई ने दबाव बनाना शुरू कर दिया।

डीएसपी वेदप्रकाश लखोटिया के अनुसार मनरेगा के इस भ्रष्टाचार को बेनकाब करने में सह परिवादी मेट सुरेश कुमार तथा एक अन्य ग्रामीण जैसाराम नायक ने भी सहयोग किया। कुल 28 में से 21 मनरेगा श्रमिकों से उनके खातों में जमा हुई मजदूरी की राशि में से आधे रुपए इकट्ठे किए गए। प्रत्येक श्रमिक के बैंक अकाउंट में मजदूरी के रूप में 1440 रुपए जमा हुए थे। इनमें से 21 मजदूरों से आधी राशि के रूप में 720 प्रत्येक मजदूर से इकट्ठा किए गए। जैसाराम और मेट सुरेश ने इकट्ठे हुए 15 हजार 120 रुपए पंच सुमन के पति अनिल बिश्नोई को दे दिए। एसीबी की योजना के अनुसार आज सुबह यह राशि अदृश्य रंग लगाकर सह परिवादियों को दी गई।प्रातः 7 दोनों परिवादी सरपंच की ढाणी में गए। उन्होंने रुपए सरपंच और वहीं मौजूद उसके भाई को सौंप दिये इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने दोनों को काबू कर लिया इस कार्रवाई के लिए दोनों डीएसपी कल देर रात से ही सरपंच की ढाणी के आसपास डेरा डाले हुए थे। कार्यवाही में सीआई विजेंद्र सीला और एसीबी के अन्य कार्मिक शामिल रहे। गिरफ्ता दोनोंं भाइयों को कल ब्यूरो की विशेष अदालत में पेश कर दिया जाएगा।

हर पंचायत में संगठित भ्रष्टाचार!

एसीबी के सूत्रों ने जिले में बताया कि सरकारी योजना का धन हड़पने का यह संगठित भ्रष्टाचार का नमूना है। इस ग्राम पंचायत में पूर्व में मनरेगा के कार्य में लगे श्रमिकों से भी इसी प्रकार मजदूरी के आधे रुपए रिश्वत में वापिस लिए जाने की संभावना से एसीबी ने इनकार नहीं किया है। एसीबी का कहना है कि आज का यह प्रकरण विधिवत रूप से ब्यूरो मुख्यालय में दर्ज होने और आगामी जांच के लिए अधिकारी नियुक्त होने के बाद अगर कोई और श्रमिक उससे भी रिश्वत लिए जाने के साक्ष्य प्रस्तुत करता है तो जांच अधिकारी ही उसमें आगे कार्रवाई करेगा। एसीबी सूत्रों ने इस बात से भी इंकार नहीं किया कि जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी इसी प्रकार से संगठित भ्रष्टाचार नहीं हो रहा है। जिले में करीब 325 ग्राम पंचायतें हैं। मनरेगा के तहत होने वाले ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्यों के लिए केंद्र सरकार से हर वर्ष अरबों का बजट आता है। सूत्रों का कहना है कि शायद ही कोई ऐसी ग्राम पंचायत होगी, जिसमें ऐसे संगठित भ्रष्टाचार नहीं होता हो। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि लोगों को ऐसे भ्रष्टाचारियों को पकड़वाने के लिए आगे आना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *