सुप्रीम कोर्ट ने देश की दो दिग्गज ऑनलाइन रिटेलरों- अमेजन इंक और वॉलमार्ट के मालिकाना हक वाली फ्लिपकार्ट के खिलाफ स्वस्थ्य कारोबारी प्रतिस्पर्धा में अड़ंगा लगाने की कोशिशों की जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया है। अदालत ने अमेजन और फ्लिपकार्ट से कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) की तरफ से कराई जा रही जांच में सहयोग करने के लिए कहा है।
CCI ने फ्लिपकार्ट से 32 संवेदनशील सवाल पूछे थे
न्यूज एजेंसी रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लिपकार्ट ने अपने खिलाफ सीसीआई की ‘अंदरूनी’ जांच को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 700 पन्ने की अपील दी थी। सीसीआई ने अपनी जांच में फ्लिपकार्ट से 32 ‘संवेदनशील’ सवाल पूछे थे और कंपनी से उसके टॉप सेलर्स की लिस्ट, ऑनलाइन डिस्काउंट और स्मार्टफोन कंपनियों के साथ हुई डील की डिटेल मांगी थी।
ऑनलाइन रिटेलरों और बायर्स के लिए झटका
अदालत का आदेश बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, जो कारोबार को बढ़ावा देने के लिए डीप डिस्कउंटिंग और कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट्स की एक्सक्लूसिव लॉन्चिंग वगैरह का सहारा लेती रही हैं। यह उन ग्राहकों के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है, जो अक्सर हेवी डिस्काउंट के चलते बजट थोड़ा बढ़ाकर महंगी चीजें भी खरीद पाते हैं।
‘कंपनियों को जांच के लिए खुद सामने आना चाहिए’
चीफ जस्टिस एन वी रमना की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अदालत में कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियां जांच और पारदर्शिता के लिए खुद सामने आएंगी, लेकिन आप तो जांच भी नहीं चाहते।’ अदालत ने दोनों ऑनलाइन रिटेलरों को जांच में सहयोग करने के लिए चार हफ्तों का समय दिया है।
दिल्ली व्यापार संघ ने सीसीआई को दी थी शिकायत
दिल्ली व्यापार संघ ने अमेजन और फ्लिपकार्ट पर कथित रूप से बाजार में हेल्दी कॉम्पिटिशन में रोड़ा अटकाने का आरोप लगा है। फिजिकल स्टोर वालों का कहना है कि दोनों ऑनलाइन रिटेलर अपने ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर चुनिंदा विक्रेताओं को खासतौर पर मोबाइल फोन की एक्सक्लूसिव लॉन्चिंग में तरजीह देती हैं।
कॉम्पिटिशन एक्ट 2002 के प्रावधानों के उल्लंघन की जांच
दोनों कंपनियों ने सीसीआई के जिस आदेश को चुनौती दी थी, वह कॉम्पिटिशन एक्ट के सेक्शन 26(1) के तहत जारी किया गया था। सीसीआई ने अपने डायरेक्ट जनरल को यह जांच करने का आदेश दिया था कि कहीं वे कॉम्पिटिशन एक्ट 2002 के प्रावधानों का उल्लंघन तो नहीं कर रही हैं।
फ्लिपकार्ट और अमेजन की दलील, CCI के पर्याप्त सबूत नहीं
अमेजन और फ्लिपकार्ट का कहना है कि उन्होंने कारोबार चलाने के लिए कोई गैरकानूनी कदम नहीं उठाया है। उनका कहना है कि कॉम्पिटिशन कमीशन के पास उनके खिलाफ जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। दोनों कंपनियां अपने खिलाफ सीसीआई की जांच रुकवाने के लिए कई बार अदालत गई थीं।
वाणिज्य मंत्री ने लगाई थी दोनों ऑनलाइन दिग्गजों को फटकार
कर्नाटक हाई कोर्ट ने CCI की जांच को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसलिए दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने आज उनकी याचिका खारिज कर दी। पिछले हफ्ते ही वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सीसीआई की जांच में सहयोग नहीं करने और मुकदमेबाजी शुरू करने के लिए दोनों दिग्गज ऑनलाइन रिटेलरों को जमकर फटकारा था।
आने वाले दिनों में ईकॉमर्स से जुड़े नियमों में हो सकती है सख्ती
सीसीआई की जांच पर रोक नहीं लगाने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला दोनों कंपनियों के लिए बड़ा झटका है। कॉम्पिटिशन को नुकसान पहुंचाने के (फिजिकल स्टोर वालों के) आरोप झेल रही दोनों कंपनियों को आने वाले दिनों में ईकॉमर्स से जुड़े नियमों में सख्ती का सामना करना पड़ सकता है।