जयपुर
राजस्थान सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्ज को लेकर विधानसभा में एक विधायक के सवाल पर सरकार ने चौंकाने वाला जवाब दिया है। भविष्य में वित्तीय संसाधन होने पर कर्ज नहीं लेने की कार्ययोजना के बारे में पूछे सवाल के जवाब में सरकार ने लिखा है कि राज्य सरकार के वित्तीय संसाधनों में कर्ज एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। राज्य के विकास के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए कर्ज न लिए जाने की कोई कार्ययोजना विचाराधीन नहीं है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वित्त वर्ष के खत्म होने के वक्त 31 मार्च को राजस्थान पर कुल 4.09 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। यह आंकड़ा और बढ़ने के आसार हैं। राजस्थान सरकार पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और विकास योजनाएं लाने के लिए कर्ज लेना जरूरी है। विकास योजनाओं के लिए गहलोत सरकार सत्ता संभालने के बाद पहले साल ही 60 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज ले चुकी है। इसमें 58 हजार करोड़ विकास के कामों के लिए बाजार से कर्ज लिया है।
भाजपा शासन के वक्त 2018 में राज्य पर 3 लाख करोड़ रुपए के आसपास कर्ज था, जो अब बढ़कर 4 लाख 9 हजार करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है। सवा दो साल में एक लाख करोड़ का कर्ज बढ़ गया। सरकारी कर्मचारियों के वेतन भत्तों और कर्ज का ब्याज चुकाने में ही राज्य सरकार की आय का बहुत बड़ा हिस्सा चला जाता है। विकास के कामों के लिए सरकार के पास पैसा बचता ही नहीं है, इसलिए कर्ज के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
इंफ्रास्ट्रक्चर के सभी प्रोजेक्ट्स पर कर्ज
बिजली, पानी से जुड़े बड़े प्राजेक्ट्स के लिए सरकार ने कर्ज ले रखा है। पेयजल स्कीम के लिए जापानी संस्था जायका से सरकार ने कर्ज लिया है। जयपुर मेट्रो और पानी की योजना पर ADB ने कर्ज दे रखा है। इसके अलावा भी बहुत से प्रोजेक्ट्स कर्ज पर हैं।
विपक्ष में रहते हुए हर पार्टी राज्य पर बढ़ते कर्जभार का हवाला देकर सरकार पर राज्य को कर्ज में डुबोने के आरोप लगाती रही है। पिछले 20 साल से ज्यादा वक्त से आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए प्रदेश पर कर्जभार बढ़ाने के कई आरोप लगाए थे। पिछले कई साल से यही सिलसिला चला आ रहा है।
हर साल कर्ज पर 23 हजार करोड़ ब्याज
राजस्थान सरकार पर कर्ज बढ़ने के साथ ब्याज का भार भी बढ़ता जा रहा है। राजस्थान सरकार को साल 2020-21 में 23,274 करोड़ रुपए ब्याज के चुकाए हैं। साल 2019-20 में 19 हजार करोड़ और 2018-19 में 17,762 करोड़ का ब्याज चुकाया। अब जैसे जैसे कर्ज भार बढ़ता जा रहा है, ब्याज की देनदारी भी बढ़ती जा रही है। राजस्थान सरकार दो साल में जितना ब्याज चुकाती है उतने में ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट पूरा हो सकता है।