Tuesday, May 5निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

मांओं को अलर्ट करने वाली रिसर्च:डायबिटीज से जूझने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों में नजर कमजोर होने का खतरा 39% तक ज्यादा; प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड शुगर कंट्रोल करें

डायबिटीज से जूझने वाली मांओं के बच्चों को भविष्य में 39 फीसदी तक नजर कमजोर होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे बच्चों की समय-समय पर आंखों की जांच करानी जरूरी है। यह दावा अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में किया है। शोधकर्ताओं का कहना है, गर्भवती महिला में डायबिटीज का असर भविष्य में बच्चे में दिख सकता है।

रिसर्च कितने बच्चों पर हुई, मां में डायबिटीज होने पर बच्चों में खतरा बढ़ता कैसे है, बच्चों में खतरे को कैसे कम करें, जानिए इन सवालों के जवाब…

सबसे पहले जानिए, रिसर्च कैसे हुई
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने डेनमार्क के 553 बच्चों पर स्टडी की। ये ऐसे बच्चे थे जिनकी मांओं को प्रेग्नेंसी से पहले टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज थी। या फिर प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई, जिसे वैज्ञानिक भाषा में जेस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं।

यह रिसर्च पूरी होने के बाद इन 553 बच्चों की तुलना उन 20 हजार बच्चों के साथ हुई जिनकी मांओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज नहीं थी। शोधकर्ताओं ने इन 553 बच्चों की अगले 25 साल तक मॉनिटरिंग की।

जितने ज्यादा कॉम्प्लिकेशन, खतरा उतना ज्यादा
चीन की नानजिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और रिसर्च टीम के हेड डॉ. जियांगबो डू का कहना है, डायबिटिक मांओं के बच्चों में 39 फीसदी तक रिफ्रेक्टिव एरर का खतरा अधिक रहता है। ऐसा होने पर आंखें चीजों पर अपना फोकस नहीं बना पातीं, नतीजा बच्चा चीजें साफ नहीं देख पाता।

डॉ. जियांगबो कहते हैं, मांओं में डायबिटीज से जुड़े कॉम्प्लिकेशन जितने बढ़ते हैं, बच्चों में भी आंखों की रोशनी कमजोर होने का रिस्क बढ़ता है। टाइप-2 के मुकाबले टाइप-1 डायबिटीज से जूझने वाली मांओं के बच्चों में खतरा थोड़ा कम रहता है।

डायबिटिक मांओं के बच्चों में रिफ्रेक्टिव एरर का खतरा बढ़ता है, इससे बच्चे की आंखें चीजों पर अपना फोकस नहीं बना पाती, नतीजा बच्चा चीजें साफ नहीं देख पाता।

डायबिटिक मांओं के बच्चों में रिफ्रेक्टिव एरर का खतरा बढ़ता है, इससे बच्चे की आंखें चीजों पर अपना फोकस नहीं बना पाती, नतीजा बच्चा चीजें साफ नहीं देख पाता।

प्रेग्नेंसी से पहले डायबिटीज की जांच कराएं
डायबिटोलॉजिया जर्नल में पब्लिश रिसर्च कहती है, इन खतरों से बचने के लिए महिलाओं को दो बातों पर ध्यान देना चाहिए। पहली, प्रेग्नेंसी से पहले और उस दौरान ब्लड शुगर की जांच कराएं। एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही कोई कदम उठाएं। दूसरा, अपने की बच्चे की आंखों की जांच कम उम्र से ही करवानी चाहिए। खतरे को घटाने के लिए समय-समय पर आंखों की जांच कराएं।

रिसर्च कम्युनिकेशन UK की हेड डॉ. लूसी चैम्बर्स का कहना है, यह रिसर्च काफी अहम है क्योंकि यह डायबिटिक मांओं के बच्चों की आंखों से जुड़ी दिक्कतों के प्रमाण देती है। प्रेग्नेंसी से जुड़े कॉम्प्लिकेशंस को दूर करने और स्वस्थ बच्चे के लिए एक्सपर्ट की सलाह से ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *