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राजस्थान में 22KM खूबसूरत रेलवे ट्रैक की LIVE रिपोर्ट:मारवाड़ से मेवाड़ के बीच पहाड़ों और जंगल से गुजरती है ट्रेन, डेढ़ साल बाद फिर शुरू हुआ खूबसूरत सफर

पाली

राजस्थान का सबसे खूबसूरत ट्रेन रूट मंगलवार से शुरू हो गया। सन् 1931 में मारवाड़ से मेवाड़ इलाके को जोड़ने के लिए यह रेलवे लाइन बिछाई गई थी। 1938 में मावली से मारवाड़ जंक्शन तक ट्रेन शुरू हुई। कोरोना काल में बंद हुई ये ट्रेन करीब डेढ़ साल बाद शुरू हुई। 152 किलोमीटर के इस सफर में 22 किलोमीटर का सफर पहाड़ों के बीच से गुजरता है। लॉकडाउन के बाद इस ट्रेन के पहले सफर में भास्कर भी सवार हुआ। जिसे फोटो और वीडियो के जरिए दिखा रहा है।

23 मार्च 2020 को कोरोना के चलते मारवाड़ से मावली ट्रेन बंद हुई थी। 24 अगस्त 2021 को एक बार फिर इस ट्रेन का संचालन शुरू किया। दुल्हन की तरह ट्रेन को सजाया गया। यात्रियों को ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। यात्री भी ट्रेन संचालन को लेकर काफी उत्साहित नजर आए। 

डेढ़ साल बाद अरावली की पहाड़ियों के बीच से गुजरी ट्रेन।

डेढ़ साल बाद अरावली की पहाड़ियों के बीच से गुजरी ट्रेन।

सुबह में सुबह 11 बज रहे थे। हम मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। गोरमघाट तक का टिकट लेकर प्लेटफॉर्म पर गए। यहां यात्रियों का ढोल-नागड़ों के साथ स्वागत किया जा रहा था। सुबह 11:21 पर ट्रेन रवाना हो गई। पाली के तत्कालीन एएसपी डॉ तेजपाल सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ट्रेन में बैठे जोधपुर के एयरफोर्स क्षेत्र में रहने वाले कपिलसिंह ने बताया कि अपने भाई धीरज के साथ जोधपुर से गोरमघाट घूमने के लिए आए हैं। मानसून की बेरूखी के चलते झरना सूखा पड़ा है, लेकिन वे इस ट्रेन में गोरमघाट तक के सुहाने सफर का आनंद लेने आए। रात गोरमघाट स्थित आश्रम में बिताएंगे और बुधवार सुबह वापस ट्रेन से मारवाड़ और फिर आगे जोधपुर जाएंगे।

152 किलोमीटर की इस ट्रेन के सफर में सुरंगे भी शामिल।

152 किलोमीटर की इस ट्रेन के सफर में सुरंगे भी शामिल।

बुजुर्ग बोली-बस के धक्कों से निजात मिली
इसी डिब्बे में बैठी बुजुर्ग गुलाबी बाई ने बताया कि वह अपने बेटे से मिलने आमेट जा रही हैं। वह काफी खुशी नजर आईं। गुलाबी बाई ने कहा कि अब बसों में धक्के खाने से निजात मिल गई। आराम से आमेट तक का सफर करूंगी, किराया भी कम लगेगा।

फूलाद रेलवे स्टेशन पर काफी देर तक ट्रेन खड़ी रही। इस तरह से कुछ पर्यटक फोटो खिंचवाते नजर आए।

फूलाद रेलवे स्टेशन पर काफी देर तक ट्रेन खड़ी रही। इस तरह से कुछ पर्यटक फोटो खिंचवाते नजर आए।

फुलाद में लोगों ने खींची फोटो
दोपहर 12:30 बजे ट्रेन फुलाद पहुंची। क्रॉसिंग के चलते यहां ट्रेन काफी देर खड़ी रही। लोग ट्रेन से उतरकर खाने पीने लगे। लोगों ने यहां ट्रेन पर खड़े होकर फोटो भी खिंचवाई। 1:45 पर ट्रेन फिर आगे चल दी, जो 2:16 पर गोरमघाट पहुंच गई।

बंदर के साथ सेल्फी खिंचाने का लोगों में क्रेज।

बंदर के साथ सेल्फी खिंचाने का लोगों में क्रेज।

यात्री बोले- काफी अच्छा लगा यहां आकर
कामली घाट निवासी निशा चौहान ने बताया कि वह परिवार के साथ गोरमघाट आई हैं। झरना सूखा पड़ा है, लेकिन यहां हमने काफी आनंद लिया। सच कहें तो कोरोना के चलते दो साल तक परिवार के साथ कहीं घूमने नहीं गए थे। यह टूर अच्छा रहा। खूब फोटो खींचे। बंदरों को चने आदि खाद्यान सामग्री खिलाई। लोगों से अपील करूंगी कि वे गोरमघाट आए और बंदरों के लिए खाद्यान सामग्री साथ लेकर आए। जिससे इनका पेट भर सके। क्योंकि वर्तमान में मानसून की बेरूखी से झरने सूखे पड़े हैं। जंगल में भी बंदरों के खाने के लिए कुछ नहीं है।

पहाड़ों पर बिछी हरियाली की चादर।

पहाड़ों पर बिछी हरियाली की चादर।

ट्रेकिंग का शौक, रात गोरमघाट में ही रुकेंगे
जोधपुर के मौलाना आजा यूनिवर्सिटी के छात्र लोकेन्द्रसिंह ने बताया कि छह दोस्तों के साथ वे जोधपुर से आए हैं। सभी को ट्रेकिंग का शौक है। फिलहाल मारवाड़ जाने के लिए गोरमघाट से ट्रेन नहीं है। इसलिए पहले से ही प्लान बनाकर आए हैं। रात गोरमघाट में रुकेंगे। प्रकृति के बीच रहने का आनंद लेंगे। खाने का सामान, तंबू आदि की व्यवस्था साथ लेकर आए हैं।

गोरमघाट रेलवे स्टेशन पर भोजन सामग्री के लिए बंदर ट्रेन में तक चढ़ जाते हैं।

गोरमघाट रेलवे स्टेशन पर भोजन सामग्री के लिए बंदर ट्रेन में तक चढ़ जाते हैं।

कई जने पहुंचे बाइक-जीप से गोरमघाटबंदर
मारवाड़ जंक्शन से यदि ट्रेन छूट जाए तो परेशान न हो। मारवाड़ से राणावास, फूलाद होते हुए कच्चे रास्ते से बाइक या जीप से भी गोरमघाट के जोगमंडी झरने तक पहुंच सकते हैं। मंगलवार को भी कई परिवार अपने निजी वाहनों से मारवाड़ की तरफ से गोरमघाट पहुंचे। वहां घूमने के बाद फिर खाना बनाकर खाने का आनंद लेते नजर आए।

गोरमघाट के सूखे पड़े झरने में फोटो लेते पर्यटक।

गोरमघाट के सूखे पड़े झरने में फोटो लेते पर्यटक।

पहले दिन लेट हुई ट्रेन
मावली पहुंचने का ट्रेन का टाइम शाम 5:10 बजे है, लेकिन रात करीब 8 बजे बाद ट्रेन मावली पहुंची।

गोरमघाट ब्रिज से गुजरती ट्रेन।

गोरमघाट ब्रिज से गुजरती ट्रेन।

जाने ब्रिटिश राज में बिछाई इस मीटर गेज रेलवे लाइन के बारे में

  • सन् 1932 में ब्रिटिश राज में मारवाड़- मेवाड़ इलाके को जोड़ने के लिए यह रेलवे लाइन बिछाई गई।
  • 1938 में मावली से मारवाड़ जंक्शन तक ट्रेन शुरू हुई।
  • मीटर गेज ट्रैक 152 किलोमीटर का है।
  • 22 किलोमीटर का सुहाना सफर। जिसमें ट्रेन पहाड़ों के बीच से गुजरती हैं।
  • करीब 6 घंटे का है मारवाड़ से मावली का सफर।
  • 23 मार्च 2020 को बंद हुई थी ट्रेन, जो मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन से 24 अगस्त को मावली तक चली।

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