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अफगानिस्तान से संक्रमण आने पर ITBP का बयान:ITBP ने ट्वीट कर बताया- काबुल से भारत आए 78 लोगों में से एक भी यात्री कोरोना पॉजिटिव नहीं पाया गया, एहतियातन क्वारैंटाइन किया

नई दिल्ली

अफगानिस्तान से मंगलवार को रेस्क्यू कर भारत लाए गए 78 लोगों में से एक भी यात्री कोरोना पॉजिटिव नहीं पाया गया है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि इनमें से 16 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं, लेकिन बाद में ITBP ने इसे खारिज करते हुए ट्वीट किया।

ITBP ने ट्वीट में बताया कि अफगानिस्तान से भारत लाए गए 78 लोगों में से कोई भी कोरोना पॉजिटिव नहीं पाया गया है। हालांकि उन्हें ऐहतियातन 14 दिन के लिए दिल्ली में स्थित ITBP के चावला कैंप में रखा गया है।

रिपोर्ट्स में दावा, 16 लोग पॉजिटिव आए
बुधवार सुबह मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि 16 यात्री कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। सभी 16 लोग एसिम्प्टोमैटिक हैं, यानी उनमें वायरस के लक्षण नहीं दिख रहे हैं। इन 16 लोगों में वे 3 सिख भी शामिल हैं, जो काबुल से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की 3 प्रतियां सिर पर उठाकर लाए थे।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिल्ली एयरपोर्ट पर इन प्रतियों को लिया था और एक प्रति को अपने सिर पर रखकर चले थे। अब तक अफगानिस्तान से 626 लोगों को भारत लाया गया है, जिसमें 77 अफगानी सिख और 228 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा भारत सरकार ने कई अफगानी अधिकारियों को भी रेस्क्यू किया है। इन भारतीयों में अफगानिस्तान की एम्बेसी में काम करने वाले लोग शामिल नहीं हैं।

रेस्क्यू मिशन को नाम मिला ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’
केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि जो भी अफगानी नागरिक वहां के हालातों से परेशान होकर भारत आना चाहेगा, वह इसे लिए आवेदन कर सकता है। सरकार ने यह भी कहा था कि इस प्रक्रिया में हिंदू और सिखों को प्राथमिकता दी जाएगी। मंगलवार को रेस्क्यू मिशन को ऑपरेशन देवी शक्ति नाम दिया गया था। तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था और 16 अगस्त से भारत सरकार ने रेस्क्यू मिशन शुरू कर दिया था।

अफगानिस्तान के पूर्व IT मंत्री सैयद अहमद शाह सआदत जर्मनी में पिज्जा बेच रहे हैं। पिज्जा कंपनी की यूनिफॉर्म पहने हुए वह जर्मन शहर लीपजिग में साइकिल पर घूमकर पिज्जा डिलीवरी कर रहे हैं। तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने से पहले ही वह देश छोड़कर जर्मनी चले गए थे। उन्होंने IT मंत्री रहते अफगानिस्तान में सेल फोन नेटवर्क को बढ़ावा दिया था।

जरीफा गफारी अफगानिस्तान की पहली महिला मेयर हैं। गफारी काबुल के पश्चिम में स्थित मैदान शहर की मेयर रह चुकी हैं। अब वे जर्मनी में रह रही हैं और शरण देने के लिए जर्मन सरकार और वहां के लोगों की शुक्रगुजार हैं। जरीफा कहती हैं- तालिबान मुझे खोजते हुए घर आए। मेरे पिता को मारा जा चुका था। हमारे हाउस गार्ड को पीटा गया। अब मैं इस तालिबान की सच्चाई दुनिया को बताना चाहती हूं। न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में जरीफा ने कई बातों का खुलासा किया है।

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