लीड्स
पाकिस्तान के पूर्व कैप्टन इंजमाम उल हक ने भारतीय कप्तान विराट कोहली के तीसरे टेस्ट में पहले बैटिंग करने के फैसले की आलोचना की है। भारत ने लीड्स के हेडिंग्ले स्टेडियम में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट में कोहली ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, पर यह भारत पर ही भारी पड़ा। भारतीय टीम पहली पारी में 78 रन ही बना सकी। वहीं, इंग्लैंड ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक अपनी पहली पारी में 8 विकेट के नुकसान पर 423 रन बना लिए हैं। इंजमाम उल हक ने कहा कि टॉस जीतकर भारत को गेंदबाजी का विकल्प चुनना चाहिए था। इंग्लैंड जैसी टीम के अगर आप कुछ दिन पहले हरा चुके हैं और चौथी पारी में सूखी पिच पर उनकी बल्लेबाजी को बर्बाद कर चुके हों, ऐसे में आप टॉस जीते तो पहले उन्हें बल्लेबाजी के लिए बुलाना चाहिए था। मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं कि इंग्लैंड की पारी भी 78 रन पर ही ढेर हो जाती, पर वे ज्यादा स्कोर नहीं कर पाते। भारतीय गेंदबाजों को पहले दो घंटे में पिच की नमी का फायदा मिलता।
भारतीय बल्लेबाजों की एप्रोच की आलोचना
इंजमाम उल हक ने पहले दिन भारतीय बल्लेबाजों के एप्रोच की भी आलोचना की और कहा कि कोई भी भारतीय बल्लेबाज इंग्लैंड के गेंदबाजों पर कभी भी दबाव नहीं बना सके। रोहित और विराट जैसे बल्लेबाज भी इंग्लैंड के गेंदबाजों पर कोई छाप नहीं छोड़ पाए। रोहित शर्मा ने 105 गेंद खेली, उन्हें आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेना चाहिए थी। आप 105 गेंदें खेलने के बाद नहीं कह सकते हैं कि आप सेट नहीं है। रोहित ने 17 रन बनाए। वहीं विराट कोहली ने 17 गेंदों का सामना कर केवल 7 रन बनाए।
रूट ने दोनों देशों के बीच टेस्ट में सबसे ज्यादा शतक
जो रूट ने भारत के खिलाफ ओवरऑल 8वां और लगातार तीसरे टेस्ट में शतक जमाया। उनका विकेट जसप्रीत बुमराह ने लिया। रूट ने 165 गेंदों का सामना कर 121 रन बनाए। वे भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा 8 सेंचुरी लगाने वाले स्टीव स्मिथ, रिकी पोंटिंग, विवियन रिचर्ड्स और गैरी सोबर्स के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। रूट भारत-इंग्लैंड के बीच हुए टेस्ट में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और एलेस्टेयर कुक का रिकॉर्ड तोड़ा। इन तीनों ने एक दूसरे देशों के खिलाफ 7 शतक लगाए थे।
बतौर टेस्ट कप्तान इंग्लैंड के लिए रूट का 12वां शतक रहा। उन्होंने इस मामले में भी कुक के रिकॉर्ड की बराबरी की। 2021 में रूट 6 शतक लगा चुके हैं। ऐसा करने वाले वे इंग्लैंड के तीसरे बैट्समैन हैं। इससे पहले डेनिस कॉम्पटन ने 1947 और माइकल वॉन ने 2002 में यह उपलब्धि हासिल की थी।