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महंगा हुआ कच्चा माल:अगस्त में घटी उत्पादन गतिविधियों की रफ्तार, जुलाई से कम रही मैन्युफैक्चरिंग PMI

नई दिल्ली

जुलाई तिमाही के दमदार जीडीपी डेटा के बाद आज अगस्त के मैन्युफैक्चरिंग PMI के डेटा आए हैं। पिछले महीने औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी की दर पॉजिटिव रही है, लेकिन यह जुलाई से कम है। अगस्त में IHS मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI 52.3 रहा है, जो जुलाई में 55.3 के लेवल पर था। इंडेक्स के 50 से ऊपर रहने का मतलब प्रॉडक्शन सालाना आधार पर बढ़ा है। इसका इससे नीचे आना प्रॉडक्शन में नेगेटिव ग्रोथ की निशानी होता है।

नए बिजनेस ऑर्डर और प्रॉडक्शन में कम बढ़ोतरी

अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग PMI घटने की वजह कंपनियों को मिले नए बिजनेस ऑर्डर और प्रॉडक्शन में बढ़ोतरी की कम दर रही। मैन्युफैक्चरिंग के मंथली डेटा के मुताबिक यह सब महामारी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के चलते हुआ है।

मैन्युफैक्चरिंग PMI लगातार दूसरे महीने 50 से ऊपर

एक प्राइवेट एजेंसी की तरफ से जारी IHS मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI लगातार दूसरे महीने 50 से ऊपर रही है। कोविड की दूसरी लहर शुरू होने के बाद भी पॉजिटिव रहा, यह आंकड़ा बताता है कि औद्योगिक क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ी हैं।

सेल्स घटने पर कंपनियों ने घटाई हायरिंग की रफ्तार

सर्वे के मुताबिक, सेल्स में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होने की वजह से कंपनियों ने हायरिंग की रफ्तार घटा दी है। कंज्यूमर की मांग और कंपनियों पर कोविड के घातक असर को लेकर बनी चिंताओं से बिजनेस सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।

ग्रोथ के मोर्चे पर अनिश्चितता, खर्च कम रखने पर जोर

IHS मार्किट की इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा ने कहा कि ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता बनने, कैपेसिटी का पूरा इस्तेमाल नहीं होने और खर्च पर लगाम लगाने पर जोर होने से अगस्त में हायरिंग फ्रीज की गई।

कंज्यूमर और इनवेस्टमेंट गुड्स का ऑर्डर और उत्पादन बढ़ा

उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रिकवरी जारी रही, लेकिन बढ़ोतरी की रफ्तार कोविड के चलते मांग में कमजोरी आने से टूट गई। हालांकि, कंज्यूमर, इंटरमीडियट और इनवेस्टमेंट गुड्स कैटेगरी के ऑर्डर और उत्पादन में इजाफा हुआ है।

अगले 12 महीनों में उत्पादन ठोस बने रहने की संभावना

लीमा ने कहा कि ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कतों और कच्चे माल की उपलब्धता घटने की वजह से उनकी इनपुट कॉस्ट बढ़ी। इसके साथ महामारी की चिंताओं से दबाव बना रह सकता है, लेकिन अगले 12 महीनों में उत्पादन ठोस बने रहने की संभावना है।

जरूरत के मुताबिक बाजार में नकदी बनाए रखने पर फोकस

मंगलवार को रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि बाजार में नकदी जरूरत के मुताबिक बनी रहे, इसके उपाय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नकदी जरूरत से ज्यादा होने पर खासतौर पर रिवर्स रेपो रेट का इस्तेमाल किया जाता रहेगा। रिवर्स रेपो वो रेट होता है, जिस पर बैंक अपना एक्सेस पैसा RBI के पास जमा कराते हैं और उस पर ब्याज कमाते हैं।

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