जुलाई 2021 इतिहास का सबसे गर्म महीना रहा है। पिछले 142 सालों से एक-एक दिन का तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि जुलाई के महीने में कभी इतनी गर्मी नहीं पड़ी। यह दावा अमेरिकी एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में किया है।
2016 से भी 0.01 डिसे. ज्यादा
एजेंसी का कहना है, दुनियाभर में जुलाई को गर्मी के लिए जाना जाता है, लेकिन इस साल जुलाई इतिहास का सबसे गर्म महीना साबित हुआ है। एजेंसी के एडमिनिस्ट्रेटर रिक स्पिनराड का कहना है, जुलाई 2016 के मुकाबले इस साल जुलाई का तापमान 0.01 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। इसका एक उदाहरण है, कनाडा। इसी साल जुलाई में कनाडा में तापमान 49.6 डिग्री पहुंचा। सैकड़ों लोगों की मौत हुई और लोग गर्मी से बेहाल नजर आए।
साल-दर-साल गर्मी क्यों रिकॉर्ड बना रही है, अब इसे भी समझिए
जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाली एजेंसी इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज ने हाल ही में एक चेतावनी दी है। एजेंसी का कहना है, अगर दुनियाभर में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम नहीं किया गया तो साल 2100 तक धरती का तापमान दो डिग्री तक बढ़ सकता है। ऐसा हुआ तो दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगीं।
कार्बन डाई आक्साइड, नाइट्रस आक्साइड, मीथेन और क्लोरो-फ्लोरो कार्बन ही ग्रीन हाउस गैस हैं, इनकी मात्रा बढ़ने तापमान बढ़ रहा है। देश-दुनिया में तेजी से कट रहे पेड़, वाहनों का धुआं, औद्योगिकरण और एयर कंडीशनर का बढ़ता इस्तेमाल इसकी वजह है।
अगले 4 साल में गर्मी का रिकॉर्ड टूटने का खतरा
दुनियाभर में धरती के गर्म होने का रिकॉर्ड टूट सकता है। वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में यह खतरा जताया है कि 2021 से 2025 के बीच एक साल ऐसा होगा जो सबसे अधिक रिकॉर्ड गर्मी वाला होगा। 40 फीसदी तक 1.5 डिग्री तापमान बढ़ने का खतरा है। वो साल 2016 में पड़ी गर्मी को पीछे छोड़ देगा। तापमान बढ़ने से लू, अत्यअधिक बारिश और पानी की कमी बढ़ सकती है।
तापमान बढ़ने का खतरा 20% से बढ़कर 40% हुआ
पिछले एक दशक में 1.5 डिग्री तापमान बढ़ने की आशंका मात्र 20 फीसदी थी, लेकिन नई रिपोर्ट में यह खतरा अब 40 फीसदी बताया गया है। ऐसा होता है तो 2015 में हुए पेरिस जलवायु समझौते में निर्धारित तापमान से ऊपर उठ जाएगा। मौसम वैज्ञानिक लियोन हरमेंसन का कहना है, दुनिया 1.5 डिग्री तापमान बढ़ने की ओर है। इसे रोकने के लिए तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है क्योंकि समय बीतता जा रहा है।
बर्फ पिछलेगी, समुद्रजल का स्तर बढ़ेगा
वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन के महासचिव प्रो. पेटेरी तालास के मुताबिक, बढ़ते तापमान से बर्फ पिछलेगी और समुद्र के जल का स्तर बढ़ेगा। इससे मौसम बिगड़ेगा। नतीजा, खाना, सेहत, पर्यावरण और विकास पर असर पड़ेगा। रिपोर्ट बताती है कि यह समय सतर्क होने का है। दुनियाभर में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है।
दक्षिण एशिया के लिए बढ़ेगा खतरा
वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी दक्षिण एशिया में रहती है। यह क्षेत्र पहले से ही सबसे ज्यादा गर्मी की मार झेलता है। ऐसे में बढ़ता तापमान यहां के लिए बड़ा खतरा है। इस क्षेत्र के करीब 60 फीसदी लोग खेती-किसानी करते हैं। उन्हें खुले मैदान में काम करना पड़ता है, ऐसे उन पर लू का जोखिम बढ़ेगा।