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अजमेर में सेंट्रल जेल के बाहर बैठी महिलाएं:कैदियों को राखी बांधने उनकी बहनों ने बाहर ही डाला डेरा, कहा- पहले लॉकडाउन में नहीं आ सके, इस बार प्रशासन ने रोका

अजमेर

अजमेर के सेंट्रल जेल में बंद भाइयों की सूनी कलाई को इस बार भी बहनों की राखी का इंतजार ही रहेगा। दूरदराज से आई बहनों और परिजन को मिलने नहीं दिया गया। कोरोनागाइड लाइन के मद्देनजर मुलाकात फिलहाल बंद है। ऐसे में प्रशासन ने उनको रोक दिया। बहनें व परिजन जेल के बाहर गेट के पास ही बैठ गए। बहनों का कहना है कि पिछले साल कोरोना के चलते लॉकडाउन में नीं आ सके। इस बार आए तो प्रशासन उनको मिलने नहीं दे रहा।

जेल के बाहर अपने भाई से मिलने की उम्मीद में खड़ी बहनें-मोहन ठाड़ा

जेल के बाहर अपने भाई से मिलने की उम्मीद में खड़ी बहनें-मोहन ठाड़ा

कोरोना गाइडलाइन के चलते जेल में इस साल मुलाकात बंद रखी गई है, इसलिए राखी पर बहनें जेल में कैदी भाइयों को राखी नहीं बांध सकती। आमतौर पर राखी के दिन बहनें कैदी भाइयों को जेल जाकर राखी बांधती हैं। जेल प्रशासन द्वारा राखी के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती है। बहनों को पर्याप्त समय दिया जाता है। कैदी भाई राखी बंधवाते हैं, बहनें उन्हें प्रण दिलवाती हैं कि अब जीवन में कभी अपराध नहीं करेंगे। इस बार भी अजमेर सेन्ट्रल जेल में बंद भाईयों के रिश्तेदार व बहनें राखी पर सुबह से आना शुरू हो गए। जेल प्रशासन ने उनको मुलाकात के लिए मना कर दिया। लेकिन मिलने की उम्मीद में बहनें व अन्य परिजन गेट के बाहर ही बैठ गए।

जेल के बाहर खड़ी कविता व उसकी भाभी शर्मिला

जेल के बाहर खड़ी कविता व उसकी भाभी शर्मिला

न तो मिलने दे रहे और न पहुंचा रहे राखी
राजपुरा-पिलानी से आई कविता जाट ने बताया कि वह दो साल पहले राखी बांधकर गई, उसके बाद आना ही नहीं हुआ। पिछले साल लॉकडाउन में आना जाना बंद था। इस बार भाभी शर्मिला के साथ आई तो प्रशासन न तो मिलने दे रहा है। न ही उनकी ओर से लाई गई राखी भाई बिजेन्द्र तक पहुंचा रहे हैं।

कविता ने बताया कि उसका भाई डोडा पोस्त के एक मामले में पकड़ा गया और तीन साल से जेल में बदं है। जिस ट्रक में बैठकर उसका भाई यात्रा कर रहा था, उसमें डोडा पोस्त मिला, ड्राइवर तो भाग गया और भाई को पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया। जेल आने के बाद ही एक बार मिल पाई। राखी पर तो मिलने देना चाहिए।

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