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अपनी बायोपिक बनाऊंगी, जिसमें भोपाल से लेकर जेल तक की जर्नी होगी- गहना वशिष्ठ

मैं बहुत टफ टाइम से गुजर रही हूं, क्योंकि बैंक अकाउंट, फोन, लैपटॉप सीज कर दिया गया है। जब से बाहर निकली हूं, एक रुपए का एक्सेस नहीं दिया गया है। मेरे घर से जूलरी भी गायब है। जेल में थी, तब मेरे घर की चाबी भी पुलिस के पास थी। जेल से निकलकर अपने घर की चाबी लेने गई, तब मैंने पूछा कि अकाउंट, मोबाइल, लैपटॉप कब देंगे? जवाब मिला कि इसमें टाइम जाएगा- यह कहना है एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ उर्फ वंदना तिवारी का। गहना खुद पर लगे एलिगेशन, जेल जाने और वहां लगभग पांच माह का वक्त गुजारने की कथा-व्यथा का पूरा वृतांत बताती हैं। पढ़िए उनकी जेल की कहानी, उन्हीं की जुबानी:

  • मैं ऑलमोस्ट पांच महीने जेल में रही। बीच में 17 दिन तक कोविड सेंटर में भी रही। जेल में कैदियों के साथ रहना, जो एक्चुअली क्रिमिनल हैं। उनका दिमाग भी क्रिमिनल की तरह ही चलता है, क्योंकि कोई किसी को मारकर आया है, कोई ड्रग्स-हीरोइन बेचकर तो कोई किडनैपिंग करके आया है। सारे क्राइम वाले हैं, उनके साथ रही। एक रूम में हम 50 से 55 लोग रहते थे। वहां आपस में औरतें दिन-रात लड़ती थीं। लगता था कि गाली-गलौज देना ही उनका काम था। उनके साथ रहना बहुत मुश्किल था, क्योंकि भोपाल, मध्यप्रदेश से हूं और वहां लोग ‘तू’ तक नहीं बोलते। मेरे लिए यह सब नया था।
  • घर में मम्मी-पापा सब पढ़े-लिखे हैं। मम्मी डॉक्टर हैं। मैं खुद इंजीनियरिंग की हूं। जबकि जेल की दुनिया, बहुत अलग किस्म की दुनिया थी। जेल में हर औरतों की अपनी क्राइम स्टोरी है। मुझसे भी पूछती थीं कि तुमने क्या क्राइम किया है? मैं निरुत्तर हो जाती थी, क्योंकि मुझे खुद को पता नहीं कि क्या क्राइम किया है। मैं कहती थी कि मुझ पर एलिगेशन लगा है कि सेट पर एक लड़की का रेप होते हुए मैंने देखा है। वे लोग मुझ पर हंसते थे। पूछते थे कि क्या शूटिंग सेट पर रेप होता है क्या? यह क्या मजाक है? लड़की को फंसाना था, इसलिए गैंगरेप का आरोप लगाया। अगर लड़का होता, तब सीधे रेप का आरोप लगा देते।
  • जेल में काफी लोग हैं, जो पांच वक्त नमाज पढ़ते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। वहां सब लोग भगवान से माफी मांगते थे, लेकिन मुझे यह नहीं पता होता था कि किस चीज की माफी मांगूं, क्योंकि मैंने वाकई ऐसा कोई क्राइम नहीं किया, जिसके लिए जेल जाना पड़ा था। न ही मैंने किसी लड़की का रेप करवाया और न ही रेप होते हुए देखा। न ऐसी कोई फिल्म बनाई, जिसे पोर्न कहें और न ही किसी को प्रेशर देकर काम करवाया। ऐसा होता भी नहीं हैं कि किसी से प्रेशर देकर काम करवाएं। वहां कैमरे और काफी लोगों की भीड़ होती है, ऐसे में कोई किसी को कैसे फोर्स करके काम कवाएगा? सबको पता था कि यह गलत ऐलिगेशन है, फिर पांच महीने जेल में रहकर आई।
  • बता दूं कि मेरे ऊपर दो केस लगे हैं। पहली केस पोनोग्रॉफी की है, जिसमें सेक्शन 354, 292, 293, 420, 34IPC, R/W 66 (E), 67 (A) IT एक्ट-2008 की धारा लगाई गई हैं, जबकि दूसरा केस गैंगरेप है और इसमें 376 (D) धारा लगी है। एक्चुअली, इनको मुझे फंसाना था। जिस पर लड़की का मुझ पर गैंगरेप लगा है, उस लड़की से शूट से पहले और शूट के बाद कभी नहीं मिली हूं। यह पुलिस भी मानती है और चार्जशीट पर भी लिखा है। लड़की कहती है कि शूट पर उसका चार-पांच लोगों ने रेप किया और मैं बैठकर देख रही थी। लड़की ने शूट के लिए पेमेंट भी ली है, यह भी कोर्ट के पास है। अब मुझे बताइए क्या कोई रेप कराने के पैसे लेता है! फिर उसके बाद एक प्रोमोशनल वीडियो है, जहां पर लड़की कह रही है कि हे गाइज! यह मेरा नाम है। आप मेरे गाने जरूर देखिए। मुझे इसमें काम करके बहुत मजा आया। आखिर रेप होने के बाद कोई ऐसा बोलता है!
  • तीसरा, लड़की का एनओसी वीडियो है, जिसमें लड़की ने कहा है कि मुझे काम के पैसे मिल गए हैं। गहना मैम के साथ काम करके बहुत मजा आया। अपनी मर्जी से काम किया है। कोई नशा इत्यादि नहीं किया था। यह सब कोर्ट में जमा है। मैंने सेट पर दो गाने शूट किए थे। एक पार्टी सांग और दूसरा रोमांटिंग सांग है। इसका पूरा रॉ फुटेज क्राइम ब्रांच के पास है। पूरे फुटेज में दिख रहा था कि लड़की खुशी-खुशी अपनी मर्जी से काम कर रही है। शूटिंग के 10 दिन तक लड़की ने मैसेज किया कि मैम आपके साथ काम करके मजा आया। मुझे जल्दी काम दीजिए, क्योंकि पैसों की जरूरत है। इसके अलावा उसका टिक-टॉक वीडियो आता रहा, जिसमें नाच-गा रही है। अब बताइए, यह सब कैसे कर रही है, वह भी गैंगरेप जैसी गंभीर एलिगेशन के बाद। इसके लिए मुझे पांच महीने जेल में डाल दिया।
  • एक और पहलू बताती हूं- चूंकि मुझे फंसाना था, इसलिए गैंगरेप गढ़ दिया, जो लड़की होकर मैं कर नहीं सकती। मैं पांच महीने जेल में थी। बाकी लोग कहां हैं? अगर चार लोग मिलकर चोरी कर रहे हैं, तब चारों अंदर होना चाहिए। जबकि किया नहीं है। लेकिन मुझे फंसाना था, सो मुझे ही जेल में डाल दिया। बाहर निकलने बाद मैंने सबसे पूछा, तब सबने कहा कि मुझे फोन तक नहीं आया।
  • चार्ज शीट कहती है कि मैं 6 फरवरी, 2021 को बायकुला जेल में इन्क्वायरी के लिए बुलाई गई हूं। उसके बाद इन लोगों ने मेरा एफआईआर साइन किया और 7 तारीख को कोर्ट में खड़ा कर दिया। क्राइम ब्रांच वालों ने मीडिया को बताया कि गहना वशिष्ठ 4 तारीख को शूटिंग स्पॉट पर मिली है। जबकि सच्चाई यह है कि इन्होंने मुझे मेरे घर से उठाया था। 4 तारीख को 14 क्राइम ब्रांच के ऑफिसर बिना वारंट के मेरे घर में घुस जाते हैं। मेरे घर से लैपटॉप, फोन, पासपोर्ट लेकर पूरा घर तहस-नहस कर देते हैं। मेरे घर से कुछ 10 से 11 लाख की ज्वैलरी भी गायब है। मेरे पास उसका प्रूफ नहीं है, पर गायब है।
  • इसके अलावा मेरे छोटे से घर में रात को तीन पुलिस वाले- फातिमा, योगिता और शिव सो जाते हैं। मुझे घर लोखंडवाला से 5 तारीख को सुबह साढ़े 9 बजे लेकर गए। मेरे घर लोखंडवाला से निकले तो बायकुला 11.30 बजे पहुंचे। वहां मुझसे नॉर्मल सवाल पूछा गया कि कहां तक पढ़ी हैं, क्या खाती हैं, कहां रहती हैं? आगे पूछा कि आप राज कुंद्रा को कैसे जानती हैं? मैंने जवाब कहा कि साथ में काम करते हैं। मुझसे कहा कि आप उनके ऊपर सारे इल्जाम डाल दो। मैंने कहा कि किस चीज के इल्जाम डालने हैं, यह तो बताओ पहले? उन्होंने कहा- यह बोल दीजिए कि सारे शूट उन्होंने आपसे जर्बदस्ती करवाए हैं। इसके बाद हम आपको जाने देंगे। मैंने कहा कि ऐसा कोई झूठ नहीं बोलूंगी। मेरे खिलाफ कोई प्रूफ हो तो केस बना दो। इस पर बोले- आपके खिलाफ कोई प्रूफ नहीं है। आप घर जाइए।
  • इस तरह 5 तारीख को मुझे घर भेज दिया। साढ़े छह बजे वहां से निकलकर साढ़े आठ-नौ बजे घर आ गई। 6 तारीख को फिर फोन करके मुझे बुलाया। दिन भर वही टाइमपास के लिए पूछे कि भोपाल से मुंबई कब आईं? आपने क्या काम किया? आपका कौन बॉयफ्रेंड था? कितना काम किया है? कितने पैसे लेकर आईं? इसके बाद फिर वही सवाल दोहराया कि राज कुंद्रा के खिलाफ क्या बोल सकती हैं? मेरा जवाब था कि कुछ नहीं बोल सकती। बोले- मैम सोच लो। हम केस बना देंगे। तब भी लगा कि ये लोग मजाक कर रहे हैं। आखिर मेरे खिलाफ कैसे केस बना सकते हैं, क्योंकि ऐसा कोई केस होता ही नहीं है। लेकिन पुलिस वालों ने लड़की को प्रेशर किया, तब उसने मेरे खिलाफ गवाही दे दी।

घरवालों ने कहा कि टेंशन मत लो, ऐसा केस बनता ही नहीं
मेरी फैमिली वालों को सब कुछ पता था, क्योंकि मीडिया में इतना ज्यादा हो-हल्ला हो चुका था। मैं जब अरेस्ट हुई थी, तब घरवालों से बात नहीं की थी। उस समय मुझसे फोन वगैरह सब कुछ छीन लिया गया था। घरवालों को फोन नहीं करने दिया गया। जैसे-जैसे घरवालों पता चला, वे मुझसे मिलने जेल में आए। जेल में मुझसे मिलने भाई और पापा आए थे। मम्मी का देहांत हो गया है। पापा ने लॉ की पढ़ाई की है। उन्होंने मिलते ही बोला कि बेटा, ऐसा कोई केस बनता ही नहीं है। यह मैटर हुआ, तब इस बारे में सारी जगह चेक करके आया हूं। यहां किसी लॉयर का नाम, नंबर हो तो बात करता हूं। सबने यही बोला कि यह फालतू का केस है, ऐसा होता ही नहीं है। टेंशन मत लो, जल्दी छूट जाओगी।

मेरी बेल हेल्थ कंडीशन पर नहीं, मैरिट बेसिस पर हुई है
मैं दो महीने पहले ही छूट गई होती, क्योंकि पहले केस पोनोग्राफी की जब चार्जशीट आई, उसके 10-12 दिन बाद बेल हो गई थी। लेकिन गैंगरेप की चार्जशीट आई, तब तक हाईकोर्ट 6 मई से 6 जून तक बंद हो गए थे। कोविड-19 की वजह से कोर्ट भी कम खुल रहे थे। मेरी जमानत हो गई है, लेकिन उसमें दो कंडीशन हैं। एक आउट ऑफ इंडिया ट्रैवल नहीं कर सकती। दूसरा, अगर ऐसे किसी शूट पर पाई गई, तब मेरी बेल कैंसिल हो जाएगी। मेरी बेल हेल्थ कंडीशन पर नहीं, मैरिट बेसिस पर हुई है। इसका मतलब मेरे खिलाफ उन्हें कोई प्रूफ नहीं मिले हैं। सारी चीजें मेरा फेवर कर रही थीं।

जेल में छोटे से कमरे में हम 50 से 55 महिलाएं रहती थीं
मुझे बायकुला महिला कारागृह में रखा गया था। वहां छोटे से कमरे में 50 से 55 महिलाएं रहती थीं। जेल में रहने वाली महिलाओं को सब पता है। उन्हें लगा कि 5 से 10 दिन में छूट जाऊंगी, क्योंकि मुझ पर जो पोनोग्रॉफी का एलिगेशन लगा है, उस पर ऑन टेबल बेल मिल जाती है। लेकिन बाद में जब ज्यादा दिन बीतने लगे, तब सब डरने लग गए कि यह तो कोई बड़ा केस हो गया है क्या। मेरे साथ महिला कैदियों का व्यवहार बहुत अच्छा था। वे मेरे बर्तन और जगह साफ कर देती थीं।

जेल के अंदर आड़े-टेढ़े केसेस के बारे में सुनने को मिला
मुझसे सबसे अजीब इंद्राणी मुखर्जी का केस लगा। वे वहां साथ में थीं। उन पर एलिगेशन है कि उन्होंने अपनी बेटी को टुकड़ों में काटकर मार दिया। घबराहट होती थी कि हे भगवान! कोई मां ऐसे भी हो सकती है, जो अपनी बेटी को काट दे। हालांकि उनसे मैंने पूछा था, तब उन्होंने यही कहा कि ऐसा कुछ नहीं किया। फिर मैंने एक लड़की का केस सुना कि उसने किसी का खून करके उसकी बॉडी के पार्ट को तेल में फ्राई करके फेंका करती थी। यह भी बहुत अजीब लगा। किसी ने अपनी बेटी का गला दबाकर मार दिया।
एक केस के बारे में सुना कि भाईंदर में एक महिला ने अपने पति को मारकर कमरे में गाड़ दिया था। उसके ऊपर बैठकर नमाज पढ़ती है और खाना खाती थी। जेल के अंदर वह लड़की मेरे बगल में ही सोती थी। उसे देखती थी, तब बहुत डर लगता था कि पता नहीं रात में क्या कर दे। मैं उससे पूछती थी कि क्या तुमने ऐसा किया है? तब वह कहती थी- देखिए! मेरा अल्लाह है, वह सब जानता है। अब वही देखेगा। मैं किसी इंसान को सफाई नहीं दूंगी।
एक महिला थी और उस पर आरोप लगा है कि उसने किसी लड़की को जूस में नशे की दवा मिलाकर पिलाकर उसका अपने पति के साथ रेप करवाया है। जबकि उस महिला का पति उसे छोड़कर किसी और से शादी करके 2 साल से दुबई में रह रहा है। उसे यह केस मजाक लगता था। लेकिन जब वह मेरे केस के बारे में सुनती थी, तब उसे और भी बड़ा मजाक लगता था। इस तरह बहुत आड़े टेढ़े केसेस के बारे में सुनने को मिला। 10-12 दिन रहने के बाद मेरा बात व्यवहार देखकर मेरे बारे में सब लोग समझने लग गए थे।

दिन-रात रोया करती थी
मैं दिन-रात रोया करती थी। अपने मेमो यानी बेल पेपर का इंतजार करती थी। ऐसा लगता था कि शायद आज मेरी बेल हुई होगी। हर कोई मेरे पास आकर यही कहता था कि तू टेंशन मत ले, तू छूट जाएगी। यहां तक कि कई मेरे लिए दुआ, नमाज और उपवास भी रखती थीं। मैं छूटकर निकलने लगी, तब वहां पर जितने भी थे, सभी खड़े होकर मेरे लिए तालियां बजाई। कुछ दौड़-दौड़ कर आकर मुझ से गले मिलीं। सबने बोला- अच्छे से जा और आराम से रह।

जेल में सुबह से लेकर रात तक की यूं होती थी दिनचर्या
देखिए, हमें सुबह-सुबह 6 बजे उठा दिया जाता था और 7:00 बजे तक चाय-नाश्ता दे दिया जाता था। नाश्ते में किसी दिन पोहा, तो किसी दिन उपमा और हलवा मिलता था। सुबह 10 बजे हमें लंच में दाल, चावल, रोटी, सब्जी मिलती थी। इसमें सब्जी अजीब किस्म की होती थी। कभी टिंडा, तो कभी मूली, तो कभी अजीब किस्म के पत्ते की सब्जी मिलती थी। पता नहीं, वह पत्ते कौन-से होते थे। 3 बजे सिर्फ चाय मिलती थी और शाम 4 बजे हमें डिनर दे दिया जाता था। खाना नाप-तौल कर मिलता था, जिसमें दो रोटी, एक-एक करछुल दाल, चावल और सब्जी होती थी। कहा जाता था कि अगर हम आपको अच्छा खाना खिलाएंगे, तब जेल का मतलब क्या होगा! अब समझ जाइए कि कैसा खाना होता होगा। खैर, शाम 5 बजे जेल में ताला लगा दिया जाता था। उसके बाद कोई बाहर नहीं निकलता था।

एक बार कैदियों को लगा मैं मर गई
वहां पर मेरा शुगर 600 था, जब जेजे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। हॉस्पिटल में भर्ती हुई, तब ऐसी हालत थी कि लोगों को लगा कि मैं मर गई। लेकिन जब वापस आई, तब सभी मुझे गले मिलने लगे। कहने लगीं कि अरे तू जिंदा है रे, तू जिंदा है? मैने कहा- जिंदा हूं, तभी तो सामने खड़ी हूं। एक-दो तो बहुत क्लोज थीं, वे तो रोने लग गईं। जेल में रहने के दौरान सूख गई थी। मेरा 7 किलो वजन कम हो गया था।

अपनी जर्नी पर बायोपिक लांच करने का प्लान बना रही हूं
मैंने लाइफ में क्या-क्या देखा, उस पर अपनी बायोपिक लांच करने का प्लान कर रही हूं। उसके लिए मुझे फाउंडर और बड़े प्रोड्यूसर भी मिल गए हैं। बायोपिक में छत्तीसगढ़ से लेकर भोपाल और मुंबई तक जर्नी होगी। यह जर्नी 25 जून 2010 से लेकर 24 जून 2021 तक की होगी। दरअसल 25 जून को पंजाब मेल पकड़कर भोपाल से मुंबई आई थी और 24 जून 2021 को बायकुला जेल से निकलकर घर पहुंची थी। खैर, मैटर शांत होने के बाद प्रोफेशनल राइटर हायर करके उसे लिखने के लिए बोलूंगी। अभी दिमाग में इतनी उथल-पुथल हो, ऐसे में लिखाई नहीं हो सकती।

मेरी बायोपिक में होगी भोपाल से लेकर जेल तक की जर्नी
मुंबई पहुंचने के बाद मुझे बहने और उसके बाद MTV पर एक शो मिला। हांगकांग में साल 2012 में एशिया बिकिनी की प्रतियोगिता जीती। साउथ गई तो वहां पर कुल 27 फिल्मों और 45 वेब सीरीज में काम किया। 2015 में एंकरिंग और 52 गानों में एक्ट किया। मैंने अपने दम पर मुंबई में घर खरीदा। लाइफ में किसी पर केस नहीं किया और न ही किसी ने मुझ पर केस किया है। हर साल समय पर टैक्स भी भरती हूं। इतना अच्छा काम कर रही थी, लेकिन एक दिन अचानक पुलिस मेरे घर में घुसती है। वह पोर्नोग्राफी और रेप का केस डाल कर मुझे 5 महीने के लिए जेल के अंदर डाल देती है। अचानक मेरी लाइफ में भूचाल आ जाता है। मैं अपना किरदार खुद निभाऊंगी, क्योंकि मुझसे ज्यादा अच्छा मेरा कैरेक्टर कोई परफॉर्म नहीं कर सकता। फिल्म का बजट बड़ा होगा, क्योंकि इसके लिए हमें जेल का सेट लगाना पड़ेगा। जेल के अंदर 250 से 300 महिला कैदियों को दिखाना होगा। इस तरह क्राउड बड़ा होगा और शूटिंग के डेज लंबे होंगे, सो स्वाभाविक है कि बजट भी बड़ा ही जाएगा। हां, इसे थिएटर में नहीं, OTT प्लेटफार्म पर रिलीज करूंगी।

जेल से 19 लड़कियों पर स्क्रिप्ट लिख कर लाई हूं
मुझे जेल में बहुत सारी महिलाओं ने अपनी कहानियां बताईं। उनमें से 19 की स्क्रिप्ट लिखकर लाई हूं। उन पर बाकायदा परमिशन लेकर शॉर्ट फिल्म बनाऊंगी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो वेब सीरीज भी बनाऊंगी। मेरे साथ सब सच बोलती थीं। वहां तो ऐसी कई कैदी हैं, जिन्हें बेल तो हो गई है, पर उनकी फैमिली के पास 10 हजार रुपए नहीं हैं, जिसकी वजह से वे कई सालों से अंदर हैं। सभी मेरे साथ बहुत अच्छे से रहती थीं, लेकिन उनके साथ रहने में मुझे बहुत घबराहट होती थी, क्योंकि आधे से ज्यादा तो तम्बाकू खाती हैं। पूरे दिन यहां से वहां थूकती रहती थीं। उसकी महक से घबराहट होती थी। पहले तो उनकी बातें डायजेक्ट ही नहीं होती थीं। वे गंदी-गंदी गाली-गलौज करती थीं। मैं तो कुछ बोलती ही नहीं थी। वहां कोई एक-दूसरे के खिलाफ बोल दे, तब उसकी मां-बहन कर देती थीं। 90 फीसदी औरतें अनपढ़ हैं। उनकी बातें सुनकर सोच में पड़ जाती थी कि मुंबई जैसी जगहों पर महिलाओं के ये हाल हैं, तब बाकी जगह क्या हाल होंगे! इस तरह उनके साथ रहना बहुत दर्दनाक था।

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