नई दिल्ली
केंद्रीय पेट्रोलियम और गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अफगानिस्तान संकट का जिक्र कर सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) को जरूरी बताया है। पुरी ने ट्वीट करके कहा कि पड़ोसी देश में सिख और हिंदुओं के साथ जैसा बर्ताव हो रहा है, उससे पता चलता है कि देश में CAA लागू करना क्यों जरूरी है।
दिसंबर, 2019 में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। इस पर पुरी ने कहा था कि CAA से देश की धर्मनिरपेक्ष साख पर कोई असर नहीं होगा। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों पर नए कानून के बारे में गलत जानकारी फैलाने का अरोप लगाया था। पुरी ने ट्वीट कर कहा कि विपक्षी दल संशोधित कानून का इस्तेमाल कर सरकार विरोधी अभियान चला रहे हैं, जिसमें गलत जानकारी फैलाना, भारत के हितों का विरोध करने वाली ताकतों को एकजुट करना और हिंसा भड़काना शामिल है।
काबुल से भारतीयों को निकालने का सिलसिला जारी
वहीं, काबुल से भारतीयों के निकलने का सिलसिला जारी है। रविवार को तीन विमानों से 390 लोग भारत लौटे, इनमें 329 भारतीय हैं। एयरफोर्स के C-17 एयरक्राफ्ट से 168 लोगों की वापसी हुई, इनमें 107 भारतीय और 23 अफगानी सिख और हिंदू शामिल हैं। इससे पहले एयर इंडिया के विमान से 87 भारतीयों और 2 नेपालियों को भारत लाया गया था। इसके अलावा एक दूसरी फ्लाइट से 135 लोगों की वापसी हुई है।
भारत पहुंचकर भावुक हुए अफगानी सांसद
एयरफोर्स के विमान से आए 168 लोगों में अफगानी सांसद नरेंदर सिंह खालसा, अनारकली होनरयार और इनके परिवार भी शामिल हैं। रविवार को भारत पहुंचने पर नरेंदर सिंह खालसा भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि 20 साल में जो कुछ बनाया था, सब खत्म हो गया। वहीं एक अफगानी महिला ने कहा कि अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब हैं, तालिबानों ने हमारा घर जला दिया।
काबुल एयरपोर्ट से हर रोज उड़ सकेंगे भारत के दो विमान
अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों के वतन वापसी की राह आसान हो गई है। काबुल एयरपोर्ट से भारत को रोजाना दो विमानों के संचालन की अनुमति मिल चुकी है। अमेरिकी और उत्तरी अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) फोर्स ने इसकी अनुमति शनिवार को दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब वे जल्द ही सभी भारतीयों को वापस लाएंगे। यहां अभी 300 भारतीयों के फंसे होने की जानकारी है।
CAA कानून क्या है?
पिछले साल देश में CAA कानून बना तो देशभर में इसका विरोध हुआ। दिल्ली का शाहीन बाग इलाका इस कानून के विरोध से जुड़े आंदोलन का केंद्र बिंदु था। कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के प्रवासियों के लिए नागरिकता कानून के नियम आसान बनाए गए। इससे पहले नागरिकता के लिए 11 साल भारत में रहना जरूरी था, इस समय को घटाकर 1 से 6 साल कर दिया गया।
दोनों सदनों से इस तरह पास हुआ था बिल
11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (CAB) के पक्ष में 125 और खिलाफ में 99 वोट पड़े थे। अगले दिन 12 दिसंबर 2019 को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। देशभर में भारी विरोध के बीच बिल दोनों सदनों से पास होने के बाद कानून की शक्ल ले चुका था। इसे गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया था। कुछ दिनों पहले गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में कहा कि गृह मंत्रालय को कानून को लागू करने के नियम बनाने के लिए 9 जनवरी 2022 तक का समय चाहिए।