नई दिल्ली
पाम, सोया और सूरजमुखी के तेल पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में दूसरी बार कमी किए जाने का असर अब दिखने लगा है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले तेलों के थोक और खुदरा भाव में पिछले एक हफ्ते के दौरान कमी आई है। लेकिन सरसों तेल का खुदरा भाव घटने के बजाय बढ़ा है। शुक्रवार को सरसों तेल की कीमत 180 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई थी जो महीने भर पहले 173 रुपए प्रति लीटर थी।
सूरजमुखी के तेल का रिटेल भाव 171 रुपए से घटकर 167 रुपए पर आया
पिछले एक महीने में रसोई तेलों का औसत रिटेल भाव मामूली घटा है। यह बात उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में कीमतों पर नजर रखने वाले विभाग ने कही है। शुक्रवार को सूरजमुखी के तेल की औसत खुदरा कीमत 167 रुपए प्रति लीटर रही। हालांकि विभाग के मुताबिक, सूरजमुखी के तेल की रिटेल कीमत पिछले हफ्ते 174 रुपए रही जो महीने भर पहले 171 रुपए प्रति लीटर थी।
बाजार में कम आवक से लगातार बढ़ रही सरसों तेल की औसत रिटेल कीमत
इसी तरह, पिछले हफ्ते 134 रुपए रही पाम ऑयल की औसत रिटेल कीमत शुक्रवार को घटकर 132 रुपए प्रति लीटर पर आ गई। लेकिन सोयाबीन ऑयल की औसत रिटेल कीमत में पिछले एक हफ्ते में कोई बदलाव नहीं आया है। शुक्रवार को इस तेल की औसत कीमत 156 रुपए प्रति लीटर रही। इन सबके बीच सरसों तेल की औसत खुदरा कीमत लगातार बढ़ रही है।
सॉल्वैंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने किया सरसों की इंपोर्ट घटाने का अनुरोध
सॉल्वैंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEAI) ने सोया और सूरजमुखी के तेल की तरह सरसों की इंपोर्ट ड्यूटी में भी कमी करने का अनुरोध किया है। उसका कहना है कि सरसों तेल के दाम में तेज उछाल को काबू करने के लिए सरकार को सरसों की इंपोर्ट ड्यूटी में बाकी तेलों के मुकाबले ज्यादा कमी करनी चाहिए। SEAI ने सरकार से यह अपील बाजार में सरसों की आवक कम होने के चलते की थी।
तेलों और तिलहन के स्टॉक पर नजर रखने के लिए बन रहा वेब पोर्टल
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, ‘सभी राज्यों और खाद्य तेल से जुड़े उद्योग संगठनों से बातचीत करने पर कीमत में ज्यादा पारदर्शिता की जरूरत महसूस की गई। इसको देखते हुए खाद्य मंत्रालय देशभर में खाद्य तेलों और तिलहन के स्टॉक पर साप्ताहिक आधार पर नजर रखने के लिए एक वेब पोर्टल बनाने में जुट गया है।
तेल मिल, स्टॉकिस्ट और होलसेलर के डेटा पोर्टल पर डाले जाएंगे
मंत्रालय ने कहा कि तेल मिल, ऑयल प्रोसेसर, स्टॉकिस्ट और होलसेलर वगैरह से मिले डेटा पोर्टल पर डाले जाएंगे। राज्यों से कहा गया है कि वे तेलों के खुदरा दाम प्रमुखता से प्रदर्शित करें, ताकि देश भर में कीमतों को लेकर पारदर्शिता बरती जा सके।