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इंसानों की तरह बंदर भी तनाव से जूझते हैं, जब बड़ा इनाम जीतने की बारी आती है तो ये भी नर्वस हो जाते हैं; अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा

बंदर भी इंसानों की तरह दबाव में आ जाते हैं। जब मामला पुरस्कार जीतने का हो तो बंदर इंसानों की तरह अपनी परफार्मेंस में जी-जान लगा देते हैं। अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बंदरों पर एक रिसर्च की। रिसर्च में सामने आया कि बंदरों में परफॉर्मेँस का दबाव बढ़ने पर ये घुटन महसूस करते हैं। जब बात पुरस्कार जीतने की आती है तो यह दबाव और बढ़ जाता है।

3 बंदरों को ट्रेनिंग देकर स्टडी की

बंदर कितना तनाव से जूझते हैं, इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने रिसर्च की। वैज्ञानिकों ने 3 रीसस बंदरों को चुनौतियों से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी। परिणाम के तौर पर सामने आया जब इनाम यानी रिवॉर्ड को जैसे-जैसे बढ़ाया जाता है बंदरों की परफार्मेंस में भी इजाफा होता है।

वैज्ञानिकों का कहना है, जब बंदरों के सामने जैकपॉट यानी सबसे बड़ा इनाम रखा गया तो 25 फीसदी बंदर फेल हो गए। इसकी वजह है जैकपॉट को जीतने के लिए बंदरों का अधिक दबाव में आ जाना। रिसर्च के मुताबिक, जिस तरह इंसान ऑडियंस के सामने परफार्मेंस देते हुए दबाव में आ जाता है वैसा ही बंदरों के साथ भी होता है।

ऐसे हुई रिसर्च
रिसर्च के दौरान 3 बंदरों को ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के दौरान इन्हें समझाया गया कि रिवॉर्ड कितना बड़ा है। इसके साथ ही इन्हें छोटे, मध्यम, बड़े जैकपॉट रिवॉर्ड को पाने के लिए ट्रेंड किया गया।

ट्रेनिंग के दौरान धीरे-धीरे रिवॉर्ड का आकार बढ़ाया गया। वैज्ञानिकों ने पाया जैसे-जैसे रिवॉर्ड बढ़ता है इनकी परफॉर्मेंस में भी इजाफा हुआ। लेकिन जब सबसे बड़े रिवॉर्ड की बारी आई तो ये अधिक तनाव में आ गए।

बड़े रिवॉर्ड को पाने के लिए इतना ज्यादा दबाव में आ गए कि परफॉर्मेंस में उल्टा 10 से 25 फीसदी तक कमी आ गई। जैकपॉट रिवॉर्ड का आकार मीडियम आकार वाले पुरस्कार से 10 गुना ज्यादा बड़ा था।

बंदर अपने बिहेवियर की मॉनिटरिंग करते हैं

पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, बिहेवियर के मामले में इंसान और बंदर कुछ हद तक मिलते-जुलते हैं। रिसर्च में यह साबित भी हुआ है। रिसर्च के दौरान प्रमाण भी मिले हैं कि बंदर अपने बिहेवियर पर खुद नजर रखते हैं। वो कितना खुश हैं और कितना नर्वस ये बखूबी समझते हैं।

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