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ई-कॉमर्स रूल में हो सकती है देरी:ड्राफ्ट पर नीति आयोग के अलावा अहम मंत्रालयों में एक राय नहीं, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय को करना पड़ सकता है बदलाव

नई दिल्ली

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ई-कॉमर्स रूल्स का जो ड्राफ्ट तैयार किया है, उस पर उसे दोबारा विचार करना पड़ सकता है। दरअसल, ड्राफ्ट का नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और कंपनी मामलों के मंत्रालय सहित कई अहम मंत्रालय विरोध कर रहे हैं। ऐसे में ई-कॉमर्स रूल्स पर फैसला लेने में देरी हो सकती है और इस सेक्टर को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। ग्रांट थॉर्नटन के मुताबिक, ई-कॉमर्स सेक्टर 2025 तक बढ़कर 288 अरब डॉलर का हो सकता है, जो अभी $64 अरब का है।

वित्त मंत्रालय को नेगेटिव असर होने का डर

वित्त मंत्रालय का कहना है कि ई-कॉमर्स के लिए जो रूल्स तैयार किए गए हैं, उनसे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने वाले इस सेक्टर पर नेगेटिव असर हो सकता है। मंत्रालय चाहता है कि ये रूल्स तेजी से बढ़ते सेक्टर की ग्रोथ में रुकावट न बनें, जिसमें बड़े पैमाने पर निवेश आए हैं। मामले के जानकार सूत्र ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने जो चिंता जताई है, शायद उस पर विचार नहीं किया जाए, क्योंकि उसका फीडबैक डेडलाइन खत्म होने के बाद आया था। कंपनी मामलों के मंत्रालय का कहना है कि रूल्स ऐसे नहीं होने चाहिए कि कॉम्पिटिशन में रुकावट आए।

फ्लैश सेल को रेगुलेट करने का प्रस्ताव

ई-कॉमर्स रूल्स का जो ड्राफ्ट तैयार किया गया है उसके मुताबिक, भारी-भरकम छूट वाली फ्लैश सेल को रेगुलेट किया जाएगा। इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों को डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। फिजिकल स्टोर को ऐसा नहीं करना होगा। रूल्स में यह प्रावधान भी किया गया है कि अगर सेलर बायर को उसका खरीदा सामान या सेवा नहीं दे पाता है, तो उसके लिए ई-कॉमर्स साइट जिम्मेदार होगी। इसके अलावा मौजूदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति को लेकर कुछ परिभाषाओं में भी बदलाव किया गया है।

सारे मामले नहीं देख सकता उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय

नीति आयोग का कहना है कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन रूल्स के दायरे से बाहर है। पहले उसने कंज्यूमर प्रोटेक्शन ई-कॉमर्स रूल्स 2020 में प्रस्तावित संशोधन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि प्रतिस्पर्धा, कानून का अनुपालन, इंटरमीडियरी की जिम्मेदारी और डेटा प्रोटेक्शन से जुड़े मसले उपभोक्ता मामलों के विभाग के कार्यक्षेत्र में नहीं आते। उसने कहा था कि इन सबसे जुड़े काम को संबंधित मंत्रालयों को देखना चाहिए, जिनमें पेचीदा मसलों को सुलझाने की क्षमता है।

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