एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोवीशील्ड वैक्सीन का तीसरा डोज ओमिक्रॉन के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनाने में कारगर है। यह दावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ही एक हालिया रिसर्च में किया गया है। साथ ही, फाइजर के ट्रायल में भी पाया गया है कि उसका बूस्टर शॉट ओमिक्रॉन को बेअसर करता है।
मॉडर्ना ने भी दावा किया है कि उसका बूस्टर डोज ओमिक्रॉन से लड़ने में सक्षम है। ये वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी के स्तर को 83% तक बढ़ाता है। नोवावैक्स कंपनी के अनुसार, भारत के सीरम इंस्टीट्यूट में बनी कोवोवैक्स भी इस वैरिएंट के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ाती है। इसके अलावा, रूस में डेव्लप हुई स्पुतनिक-V भी एक स्टडी के मुताबिक ओमिक्रॉन संक्रमण रोकने में सक्षम है।
लेकिन हांग कांग के वैज्ञानिकों की मानें, तो चीनी कंपनी सिनोवैक की वैक्सीन कोरोनावैक ओमिक्रॉन से लड़ने के लिए शरीर में पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं बनाती है।