IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने घाव पर बांधने के लिए ऐसी पट्टी विकसित की है, जिसमें कई तरह की खूबियां हैं। यह ट्रांसपेरेंट है और घाव को तेजी से भरने में शरीर की मदद करती है। इसे सिंथेटिक पॉलिमर से तैयार किया गया है और बायोडिग्रेडेबल है। यानी इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंच सकता। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह पट्टी बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेगी।
कैसे घावों को भरती है यह पट्टी
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह पट्टी नमी को बढ़ाती है। यह नमी शरीर में मौजूद एंजाइम की मदद से घावों को भरती है। नतीजा, इस पट्टी को लगाने के साथ शरीर अपने आप ही घावों को भरना शुरू कर देता है। यह दूसरी पट्टियों के मुकाबले 50 फीसदी तक कम दामों पर उपलब्ध हो सकती है।
इसलिए ट्रांसपेरेंट पट्टी को तैयार किया गया
घावों को भरने वाली पट्टी बनाने के लिए आमतौर पर कॉटन वूल का प्रयोग किया जाता है। इनसे अक्सर घाव के रिसाव को रोकने और कम समय में घाव को भरने में प्रयोग किया जाता है। लेकिन, इन पट्टियों को हटाने के दौरान कई बार घाव के रिपेयर हुए टिश्यू डैमेज हो जाते हैं।
इन दिक्कतों से बचने के लिए ट्रांसपेरेंट पट्टियों को तैयार किया गया है। इसकी मदद से घावों को बाहर से देखा जा सकेगा और इलाज आसान हो सकेगा।

शोधकर्ताओं का कहना है, दूसरी पट्टियों से घावों को देखा नहीं जा सकता, लेकिन नई ट्रांसपेरेंट पट्टी लगी होने पर बाहर से घाव को देखा जा सकता है। इससे बेहतर इलाज हो सकेगा।
सिंथेटिक पॉलिमर और हाइड्रोजेल से इसे बनाया गया
इस पट्टी को डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग की टीम ने मिलकर तैयार किया है। शोधकर्ता अरित्रा दास कहती हैं, इस पट्टी को तैयार करने में पॉलिविनायल अल्कोहल जैसे सिंथेटिक पॉलिमर और हाइड्रोजेल का प्रयोग किया गया है। इसके कारण यह पट्टी नॉन-टॉक्सिक है और लो-कॉस्ट है।