Thursday, May 7निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

कैबिनेट विस्तार:राजस्थान की उम्मीदें चकनाचूर

श्रीगंगानगर। मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार से राजस्थान को कुछ मिला या नहीं मिला जो था वह भी कम हो गया, इस पर चर्चा से यह पहले यह जान लेना चाहिए कि यह विस्तार हुआ क्यों है? दरअसल मोदी सरकार पूरे समय इलेक्शन मोड में रहती है। उसके तमाम निर्णय केंद्र व राज्यों में चुनाव को लेकर होते रहे हैं। इसलिए ताजा विस्तार पर उत्तर प्रदेश चुनाव की छाया साफ नजर आ रही है। १३ मंत्रियों की छुट्टी का आधार भी उनका कामकाज नहीं है, क्योंकि वास्तविकता ये है कि मोदी सरकार के किसी मंत्री को अपने स्तर पर फैसला लेने की छूट नहीं है। लोग प्रकाश जावडेकर की रवानगी के लिए उनके प्रदर्शन को जिम्मेदार बता रहे हैं जबकि जानकारों के मुताबिक मोदी जी के विज्ञापनों में उनका फोटो कौनसा छपेगा,यह तक सूचना प्रसारण मंत्रालय नहीं बल्कि पीएमओ तय करता था। इसी तरह रविशंकर प्रसाद ट्विटर विवाद नहीं बल्कि इसलिए हटाये गए कि उनकी पीढ़ी को विदा करना था।अब कैबिनेट में राजनाथसिंह और नितिन गडकरी को छोड़कर कोई भी मोदी से वरिष्ठ नहीं रहा है। सत्ता के केंद्रीकरण का लक्ष्य तभी पूरा होता है, जब एक व्यक्ति को शक्ति का केंद्र बना दे। इसका यह लाभ भी है कि उसके अच्छे कार्यों का श्रेय सिर्फ पीएम को मिलेगा और कोई भी नाकामी मंत्रियों के मत्थे डाल दी जाएगी। नई कैबिनेट उम्र और शिक्षा के लिहाज से मजबूत है लेकिन अनुभव और दक्षता को कोई तवज्जो दी गई है ऐसा नहीं लगता।

राजस्थान से राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव कैबिनेट मंत्री बने हैं। संगठन में उन्होंने अच्छे परिणाम दिए हैं। अब वे क्या कर पाते हैं, समय बतायेगा। वैसे वे राजस्थान नहीं हरियाणा से संबंध रखते हैं। छात्र जीवन को छोड़कर राजस्थान में उनकी राजनीतिक सक्रियता नहीं रही है। इसी तरह अश्वनी वैष्णव रेल मंत्री बने हैं, उनका परिवार जोधपुर में रहता है।इसके अलावा राजस्थान से कोई जुड़ाव उनका नहीं है। राजस्थान से २५ लोकसभा सांसदों के होते हुए भी राज्यसभा सांसद को मंत्री बनाने से सांसदों में कसमसाहट है, पर किसी में इतना हौंसला नहीं है कि अपना दर्द बयान कर सकें। अर्जुनराम मेघवाल के विभाग कम कर दिए गए हैं। उन्हें अब राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए “भाभी जी” के पापड़ का ही सहारा है। स्वामी सुमेधानंद और राहुल कस्वां की चर्चा हुई पर उन्हें मिला कुछ भी नहीं। राज्यवर्धन राठौड़ की वापसी की उम्मीद पर अब पूर्ण विराम सा लग गया है। जहां तक श्री गंगानगर से सांसद और पूर्व मंत्री निहालचंद मेघवाल का सवाल है तो जाहिर है कि एक मेघवाल के रहते दूसरे मेघवाल को मंत्रिमंडल में यह जाने की संभावनाएं पहले भी कम थीं और आगे भी रहेंगी। निहालचंद के समर्थकों की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिरा है। केंद्र सरकार के पिछले कार्यकाल में उन्हें मंत्री पद मिला लेकिन खराब परफॉर्मेंस के चलते कुछ ही समय बाद हटा दिया गया। इस बार उनको मौका अभी तक नहीं मिला। कारण उनका एक मामला अदालत में विचाराधीन होना भी है।लोगों का कहना है कि राजस्थान से दो- तीन सांसदों को अब २०२३ में मंत्री बनाया जा सकता है।

राजस्थान को नई कैबिनेट में कुछ मिला या नहीं मिला, प्रदेश भाजपा का एक ऐसा खेमा खुश है कि राहुल कस्वां का पत्ता कट गया और एक राज्यपाल द्वारा उनकी पैरवी काम नहीं आई है। फिलहाल तो राज्य के भाजपाई भूपेंद्र यादव से नजदीकियां बढ़ाने में लगे हैं। आने वाले समय में गजेंद्रसिंह शेखावत और भूपेंद्र यादव में राजनीतिक वर्चस्व का संघर्ष भी देखने को मिल सकता है क्योंकि वसुंधरा राजे की शक्ति को कम करने में जुटी भाजपा को तय करना होगा कि वह राज्य के विकल्प के रूप में किसे मजबूत करना चाहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *