डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ना आश्चर्यजनक है। एकसाल पहले वेबसाइट कॉइनमार्केटकैप पर 6,000 करेंसी लिस्टेड थी। आज 11,145 करेंसी लिस्ट हैं। उनका कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.44 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर आज 11.86 लाख करोड़ रुपए हो गया है। डिजिटल करेंसी की 63% ट्रेडिंग संस्थाएं और कंपनियां कर रही हैं। इसके बावजूद क्रिप्टोकरेंसी के बाजारों में जबर्दस्त उथल-पुथल मची है। इससे डिजिटल करेंसी के खत्म होने की आंशकाओं ने जन्म लिया है।
बिटकॉइन की कीमत अप्रैल में 47 लाख रुपए से घटकर मई में 22 लाख रुपए रह गई थी। आज यह 29 लाख रुपए के आसपास है। 29 जुलाई को तो बिटकॉइन का बाजार कीमत 21 लाख रुपए पर आ गई थी। गिरावट के बाद निवेशकों को डर है कि कहीं ये गिरावट भारी न पड़ जाए। क्योंकि उनका क्रिप्टोकरेंसी में बहुत कुछ दांव पर लगा है।
बिटकॉइन की गिरावट पर ट्रेडर्स भारी लेनदेन कर रहे हैं। करेंसी के गिरने पर क्रिप्टो इकोनॉमी बैठ जाएगी। डिजिटल रूप से बिटकॉइन बनाने वाले माइनर्स को नए कॉइन दिए जाते हैं। यदि करेंसी में भारी गिरावट आएगी तो वे कॉइन बनाना बंद कर देंगे। निवेशक भी बाकी अन्य क्रिप्टोकरेंसी से छुटकारा पा लेंगे। डेटा फर्म चेन एनालिसिस के फिलिप ग्रेडवैल का कहना है, ताजा हलचल ने दर्शाया है कि बाकी डिजिटल करेंसी भी बिटकॉइन का अनुसरण करेंगी।
बिटकॉइन के गिरने से बहुत नुकसान होगा। इसमें हेजफंड, यूनिवर्सिटी के धर्मादा फंड, म्युचुअल फंड और कुछ कंपनियों सहित अधिकतर संस्थागत निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ेगा। डिजिटल करेंसी के ध्वस्त होने से क्रिप्टो एक्सचेंजों और क्रिप्टो कंपनियों को घाटा होगा।
14 लाख करोड़ रुपए का नुकसान संभव
बिटकॉइन के पूरी तरह गिरने से बहुत नुकसान हो सकता है। क्रिप्टोकरेंसी को पहले झटके से 14.82 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। गिरावट का असर कई चैनलों से अन्य एसेट्स पर पड़ेगा। बिटकॉइन में निवेश किया गया 90% पैसा डेरिवेटिव्स में लगाया गया है। इनमें से अधिकतर की ट्रेडिंग एफटीएक्स, बिनांस जैसे नियमन के दायरे से बाहर रहने वाले एक्सचेंजों से होती है। थोड़े से उतार-चढ़ाव का बहुत असर होगा। एक्सचेंजों को भारी घाटा उठाना पड़ेगा।