एंबुलेंस से हुई दुर्घटना का कलीम ने देने का मामला
श्रीगंगानगर। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी(पीएमओ) के कार्यालय को आज श्रम न्यायालय के एक मामले को लेकर अचानक कुर्क करते हुए सील कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर 11बजे न्यायालय के आदेश पर तहसीलदार संजय बिंदल और अन्य कर्मचारी जिला अस्पताल पहुंचे, जहां पीएमओ डॉ बीएस चौहान की गैरमौजूदगी में कार्यालय के मेज, कुर्सी, फ्रिज, सोफा सेट तथा एयर कंडीशन को कुर्क करते हुए दरवाजे पर सील लगाकर सीज कर दिया गया। अचानक हुई इस कार्यवाही से जिला अस्पताल के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कोर्ट की कार्रवाई करने के पश्चात अस्पताल के अधिकारियों ने पुराने मामलों के रिकॉर्ड को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि 2015 में श्रम न्यायालय द्वारा पारित एक आदेश के तहत पीड़ित व्यक्ति को 75 हजार का क्लेम भुगतान नहीं किए जाने पर श्रम न्यायालय के आदेश पर यह कार्यवाही की गई है। इस कार्यवाही के समय पीएमओ डॉ बलदेवसिंह चौहान जिला कलेक्ट्रेट उच्च अधिकारियों की एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में गए हुए थे। तहसीलदार संजय बिंदल कर्मचारियों सहित जब पीएमओ के कार्यालय में मौजूद सामान को सूचीबद्ध कर रहे थे,तभी हस्पताल के उप नियंत्रक वह अनेक कर्मचारी पहुंचे पूछने पर अवगत करवाया गया कि श्रम न्यायालय द्वारा 19 अगस्त 2015 को प्रकरण संख्या 16/2011 में पारित किए गए आदेश के अनुसार लगभग 75 हजार की राशि पीड़ित विश्वनाथ नामक व्यक्ति को नहीं दिए जाने पर यह कार्यवाही की जा रही है। प्रकरण के अनुसार वर्ष 2011 में स्थानीय ई-ब्लॉक में शीतला माता वाटिका के पास जिला अस्पताल की एक एंबुलेंस की टक्कर लगने से विश्वनाथ नामक व्यक्ति घायल हो गया था। बताया जाता है कि उस समय एंबुलेंस को गौरीशंकर नामक चालक चला रहा था। इस दुर्घटना के समय एंबुलेंस का बीमा नहीं था। पीड़ित व्यक्ति ने श्रम न्यायालय में परिवाद दायर किया।इस पर सुनवाई करते हुए 2015 में आदेश पारित किया गया कि पीड़ित को मुआवजा राशि दी जाए। मगर मुआवजा राशि नहीं दी गई। आज कुर्की की कार्रवाई करने आए अधिकारियों ने बताया कि लगभग 75 हजार की वसूली बाकी है। पीड़ित को जब क्लेम भुगतान नहीं मिला तो उसने श्रम न्यायालय का दरवाजा फिर खटखटाया,जिस पर वसूली और कुर्की के आदेश जारी किए गए। जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में अदालत का आदेश आने के बाद जिला अस्पताल में पीएमओ रहे किसी भी अधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अदालत के आदेश हस्पताल की फाइलों में दबकर रह गए, जिसे आज कर्मचारियों ने ढूंढ निकाला। सूत्रों ने बताया कि पीएमओ का कार्यालय अब तभी खुलेगा जब क्लेम राशि का भुगतान हो जाएगा। पीएमओ डॉ बीएस चौहान बाद में अस्पताल के अन्य कक्ष में बैठकर अपना काम करते हुए देखे गए।