ज्ञानी रघुबीर सिंह बने श्री अकाल तख्त के नए जत्थेदार
by seemasandesh
अमृतसर में एसजीपीसी की मीटिंग में लिया गया फैसला अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने शुक्रवार को यानी आज ज्ञानी रघबीर सिंह को अकाल तख्त का नया जत्थेदार बनाया गया है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाते हुए उनकी जगह पर ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार नियुक्त किया जा रहा है। ज्ञानी रघबीर सिंह तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार थे। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के साथ-साथ ज्ञानी रघवीर सिंह केसगढ़ साहिब के जत्थेदार बने रहेंगे। तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार रहेंगे ज्ञानी हरप्रीत सिंह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की अंतरिम कमेटी की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें यह फैसला किया गया है। एसजीपीसी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी गई। ज्ञानी हरप्रीत सिंह हालांकि बठिंडा में तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार बने रहेंगे। जानकारी के मुताबिक ज्ञानी हरप्रीत सिंह को लेकर शिरोमणि अकाली दल काफी समय से नाराज चल रहा था। पिछले दिनों ज्ञानी हरप्रीत सिंह के आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा की सगाई में जाने के बाद विवाद और बढ़ गया था। इतना ही नहीं ज्ञानी हरप्रीत सिंह के कई फैसलों को लेकर अकाली दल को विगत हालातों से जूझना पड़ा था। यह भी बताया जा रहा है कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने खुद ही पद छोड़ दिया है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह स्वेच्छा से त्यागा पद ज्ञानी रघुबीर सिंह श्री हरिमंदिर साहिब के हेड ग्रंथि रहे हैं और 2017 में उन्हें केसगढ़ साहिब के जत्थेदार नियुक्त किया गया था। 6 साल बाद होने अब उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार का पद सौंपा जा रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा है कि श्री अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने स्वेच्छा से इस पद को त्याग दिया है। एडवोकेट धामी ने कहा है कि उनकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए उनकी इस अपील को स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि वे तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार बने रहेंगे। उनकी जगह पर तख्त श्री केसगढ़ साहब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त का कार्यकारी जत्थेदार मनोनीत कर दिया है। आप से नजदीकी बढ़ने के आरोपों को सिरे से नकारा एडवोकेट धामी ने आगे कहा कि लंबे समय से सिख कौम में कार्यकारी की बजाए पक्के तौर पर जत्थेदार मनोनीत किए जाने की मांग की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने उनसे बातचीत के दौरान श्री अकाल तखत साहिब का स्थाई जत्थेदार मनोनीत करने को कहा था। उनकी इस इच्छा को स्वीकार करते हुए यह तब्दीली की गई है। जब एडवोकेट धामी से पूछा गया कि क्या उन्हें आम आदमी पार्टी अथवा आप सरकार के साथ नजदीकी संबंधों के कारण जबरन उनसे इस्तीफा लिया गया है तो एडवोकेट धामी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। जत्थेदार हरप्रीत सिंह दोनों तख्तों पर सेवा निभाने में असमर्थता जताई थी।