जयपुर
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बीजेपी और आरएसएस पर फिर जुबानी हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में डोटासरा ने कहा कि बीजेपी में आपसी झगड़े सबसे ज्यादा हैं। बीजेपी खोखली हो चुकी है। हमें तो यह लग रहा है कि ये फिर से पावों पर खड़े हो पाएंगे या नहीं। हम चाहते हैं कि विपक्ष मजबूत हो। ढाई साल में एक काम ऐसा बता दीजिए, जो अच्छा किया हो।
डोटासरा ने निंबाराम को लेकर फिर निशाना साधा और कहा कि निंबाराम को सामने आना चाहिए। मुकदमा हुआ है तो अब पुलिस को सामने आकर बताना चाहिए, लखनऊ या दिल्ली में छिपने से तो काम नहीं चलेगा। जांच में सहयोग करना पड़ेगा। दुर्भाग्य है कि ऐसे लोग पर्दे के पीछ से राजनीति करते हैं। ये लोग न जनता से सीधा सरोकार रखते हैं, न चुनाव जीतकर आते हैं। केंद्र हो या राज्य दोनों जगह ये पर्दे के पीछे से राज करते हैं। जहां मौका मिलता है वहां भ्रष्टाचार में आकंठ डूब जाते हैं और मुकदमा दर्ज होने पर छिपकर बैठ जाते हैं। भ्रष्टाचार में आंकठ डूब जाना उनकी फितरत में हैं। पर्दे के पीछे से राजनीति करना आरएसएस की फितरत है। वंदे मातरम और भारत माता की जय सब बोलते हैं, आरएसएस बीजेपी वाले ऐसे पेश करते हैं जैसे केवल वे ही बोलते हैं।
अरुण चतुर्वेदी माफी मांगें, आरएसएस की पाठशाला में हल्की बातें ही सिखाई जाती हैं
डोटासरा ने बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के सीएम को तोते पालने के शौक वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि बौखलाहट भरा बयान है। सभी मंत्री मुख्यमंत्री के सहयोगी हैं। सीएम मंत्रियों से कहते हैं कि आप सब साथी हो। यह ओछी बयानबाजी है, आरएसएस की पाठशाला में ही इस तरह की हल्की बातें सिखाई जाती है। मैं व्यक्तिगत रूप से उम्मीद नहीं करता हूं कि वे इस तरह ओछी भाषा बोलेंगे, खुद चतुर्वेदी को भी अहसास हुआ होगा। वे माफी नहीं मागते हैं तो यही माना जाएगा कि आरएसएस की पाठशाला में यही सिखाया जाता है।
बीजेपी राजस्थान में विपक्ष की भूमिका निभा पाने में विफल
डोटासरा ने कहा कि बीजेपी के केंद्रीय मंत्री जनआशीर्वाद यात्रा का ढोंग कर रहे हैं। जनता का आशीर्वाद लेने से पहले राजस्थान के 25 बीजेपी सासंदों, केंद्रीय मंत्रियों को हिसाब देना चाहिए कि उन्होंने राजस्थान के लिए क्या किया। बीजेपी के मंत्री झूठे भाषण देने और किसानों के घावों पर नमक छिड़कने के लिए यात्राएं कर रहे हैं। बीजेपी राजस्थान में प्रतिपक्ष की भूमिका नहीं निभा सकी, जनता इन्हें जान चुकी है। पिछले ढाई साल में एक आंदोलन नहीं कर सके। राजस्थान के कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता केंद्र की जनविरोधी नीतियों का सड़कों पर विरोध कर रहे हैं।